देहरादून, [सुमन सेमवाल]: जिस तरह बिल्डरों ने रेरा में पंजीकरण के समय प्रोजेक्ट पूरा होने की अवधि कुछ और बताई है और निवेशकों के साथ किए गए अनुबंध में कुछ और, उसे देखते हुए तब तक किसी बिल्डर की हकीकत सामने नहीं आ पाएगी, जब तक कि कोई निवेशक शिकायत नहीं कर देता। बिल्डरों के इस खेल को भांपते हुए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने का रास्ता ढूंढ निकाला है। तय किया गया है कि बिल्डरों के प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी ऑनलाइन साझा की जाएगी।

जानकारी ऑनलाइन साझा करने के लिए रेरा वेबसाइट तैयार कर रहा है। साइट पर बिल्डरों के नाम और उनके प्रोजेक्ट के पूरा होने की अवधि समेत तमाम जानकारी दर्ज की जाएगी। इस आधार पर निवेशक खुद यह जान पाएंगे कि बिल्डरों ने उनके साथ किए अनुबंध में कब्जा देने की जो अवधि बताई है, उस अवधि तक प्रोजेक्ट पूरा भी हो पाएगा या नहीं। 

सचिव आवास व रेरा के नियामक प्राधिकारी अमित नेगी के मुताबिक एक माह के भीतर वेबसाइट तैयार कर दी जाएगी। वेबसाइट में प्रोजेक्ट की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही निवेशक शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।

दर्जनों बिल्डरों ने किया खेल

रेरा में अब तक 237 बिल्डर पंजीकरण को आवेदन कर चुके हैं और 82 बिल्डरों के पंजीकरण पर मुहर लग चुकी है। जबकि दर्जनों बिल्डरों के दस्तावेज यह बता रहे हैं कि प्रोजेक्ट के पूरा होने की जो अवधि उन्होंने रेरा को बताई है, असल में वह अवधि निवेशकों के साथ किए गए अनुबंध से कहीं अधिक है। साफ है कि बिल्डरों ने निवेशकों को धोखे में रखने का काम किया है। 

इस तरह वही बिल्डर रेरा की कार्रवाई झेलेंगे, निवेशक जिनकी शिकायत करेंगे। जबकि वेबसाइट में जानकारी मिलने के बाद निवेशकों को स्वत: ही पता लग जाएगा कि बिल्डर उन्हें धोखे में रख रहा है।

सचिवालय आवास समिति को राहत

उत्तराखंड सचिवालय सहकारी आवास समिति की कारगी क्षेत्र में की गई करीब 117 बीघा की प्लॉटिंग को रेरा से राहत मिलती दिख रही है। रेरा में पंजीकरण कराए बिना प्लॉटिंग करने पर समिति को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद समिति ने रेरा में पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया था। 

हालांकि, दोबारा पेंच इस बात का फंस गया था कि यह भूखंड दो हिस्सों में खरीदा गया है। इसका रास्ता निकाला गया कि यदि समिति अलग-अलग शुल्क जमा करा दे तो पंजीकरण से पेंच हट जाएगा। इस आशय का नोटिस रेरा ने समिति के भेज दिया है।

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