देहरादून, जेएनएन। ब्रेन स्ट्रोक मौत और दिव्यांगता का सबसे बड़ा कारण है। उम्रदराज लोग ही नहीं युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन स्ट्रोक होने पर सबसे जरूरी चीज समय है। ब्रेन स्ट्रोक होने पर पहला घंटा ही गोल्डन आवर माना जाता है। अगर मरीज शरीर के अंग को टेढ़ा कर रहा है, उसके देखने, सुनने व समझने की क्षमता प्रभावित हो गई हो तो फौरन डॉक्टर के पास ले जाएं। समय पर अस्पताल पहुंचाने पर उसे स्वस्थ किया जा सकता है। इसमें जरा भी देर मरीज के स्वास्थ्य पर पूरी उम्र भारी पड़ सकती है।

मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नितिन गर्ग ने बताया कि स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की नसों में खून का बहाव बहुत ही कम होता है। जिसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत हो जाती है। मुख्यत: दो प्रमुख प्रकार के स्ट्रोक होते हैं। पहला, इस्कीमिक स्ट्रोक, जिसमें रक्त प्रवाह की कमी के कारण हैमरेज हो जाना प्रमुख लक्षण होता है। इस प्रकार का स्ट्रोक मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से को नॉन-फंक्शनल कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि स्ट्रोक आने के बाद एक सेकेंड में 3200 से ज्यादा मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत हो जाती है, इसीलिए एक-एक पल कीमती होता है। दीर्घ कालीन अपंगता से बचने के लिए रोगी का उपचार जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। पर समस्या यह है कि अभी भी बहुत कम स्ट्रोक रोगियों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल पाती है। जिसका प्रमुख कारण सही समय पर लक्षणों की पहचान न कर पाना और उसे संभालने के लिए एक सुसज्जित अस्पताल की कमी होना है। 

अधिकांश मामलों में स्ट्रोक का पता लगने और मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी समय बर्बाद हो जाता है। कई बार मरीज बहुत देरी से अस्पताल पहुंचता है, जो बेहद घातक होता है। डॉ. गर्ग के अनुसार स्ट्रोक  किसी के बीच भेदभाव नहीं करता है। यह किसी भी आयु वर्ग, किसी भी सामाजिक स्तर और किसी भी लिंग के व्यक्ति को प्रभावित करता है। भारत में 12 प्रतिशत स्ट्रोक के मामले 40 साल से कम उम्र के व्यक्तियों में होते हैं 50 प्रतिशत स्ट्रोक उच्च मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल के कारण होते हैं।

इन कारणों से बढ़ता है जोखिम

  • उच्च रक्तचाप
  • ब्लड शुगर बढ़ना
  • वैल्वूलर हृदय रोग
  • धूमपान
  • मोटापा
  • शराब पीना
  • भोजन का अनुपयुक्त सेवन

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