देहरादून, राज्य ब्यूरो। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के फैसले को सत्तारूढ़ दल भाजपा के विधायकों ने ही मजाक बना दिया। मुख्यमंत्री राहत कोष में सभी विधायकों के वेतन-भत्तों से 30 फीसद कटौती की गई धनराशि जमा करने के सरकार के फैसले से ज्यादातर भाजपा विधायक कन्नी काट रहे हैं। पार्टी के 57 में से 46 विधायकों ने बीते तीन महीनों में निर्धारित से कम कटौती कराई। इनमें भी 13 विधायक प्रतिमाह सिर्फ 9000 रुपये कटौती कराने का साहस जुटा पाए हैं। इनमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत भी शामिल हैं। 

सरकार पर इस फैसले में विपक्ष को साथ नहीं लेने का आरोप लगा रही कांग्रेस के सभी 11 विधायकों ने सरकार के फैसले के साथ कदमताल कर भाजपा को आइना दिखा दिया। सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सभी विधायकों से समान कटौती की जाएगी। जरूरत पड़ी तो अध्यादेश लाया जाएगा। लॉकडाउन के चलते आमदनी गिरने और कोरोना संक्रमण के मद्देनजर आम जनता की स्वास्थ्य समेत विभिन्न जरूरत पूरी करने का हवाला देते हुए सरकार ने सभी मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्ते में 30 फीसद कटौती का निर्णय लिया। कोरोना महामारी के दौर में आम जनता को राहत पहुंचाने की उसकी पहल को अपनों ने ही धता बता दिया। 

इसका खुलासा कांग्रेस के केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने किया। सूचना के अधिकार में मांगी गई उनकी जानकारी ने सच से पर्दा हटा दिया। विधानसभा ने उन्हें मुहैया कराई सूचना में नेता सदन यानी मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और मंत्रियों के वेतन में कटौती सूचना नहीं दी है। विधायक रावत ने कहा कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा कैबिनेट मंत्री के समकक्ष है। वह वेतन-भत्तों में से 30 फीसद के तौर पर 75600 रुपये की कटौती करा रही हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल समेत सभी कांग्रेस विधायकों की सहमति के बाद उनके वेतन-भत्तों से 57,600 रुपये काटे जा रहे हैं। 

भाजपा के 58 में 57 निर्वाचित और एक मनोनीत विधायक में केवल 13 विधायकों के वेतन-भत्ते से 57,600 रुपये की कटौती हो रही है, जबकि पार्टी के 16 विधायकों ने प्रतिमाह सिर्फ 30,000 कटौती पर हामी भरी है। विधायक और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान भी 30 हजार कटौती कराने वालों में शामिल हैं। चार विधायक 12,600 रुपये कटौती करा रहे हैं। विधायक मनोज रावत ने कहा कि सरकार ने इस फैसले में विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया। इस वजह से जून माह से सहमति बनने के बाद सभी विधायक निर्धारित कटौती करा रहे हैं। वहीं भाजपा विधायक भले ही बीते अप्रैल माह से वेतन कटौती करा रहे हैं, लेकिन अपनी सरकार के फैसले का सम्मान नहीं कर रहे हैं। 

गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले पर आपत्ति के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पक्ष व विपक्ष के विधायकों को पत्र भेजकर वेतन कटौती पर सहमति देने को कहा था। संपर्क करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने सफाई दी कि उन्हें यही जानकारी है कि मूल वेतन से 30 फीसद कटौती होगी। अगर भत्तों में कटौती की जानी है तो इस पर भी सहमति दी जाएगी। वहीं सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कैबिनेट ने ये फैसला सभी विधायकों के लिए समान रूप से लिया है। भाजपा के सभी विधायकों के वेतन-भत्ते से समान रूप से कटौती की जाएगी। जरूरत पड़ी तो सरकार अध्यादेश लाएगी। 

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महज 9000 वेतन कटौती कराने वाले विधायक 

बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, दलीप सिंह रावत, पूरन सिंह फर्त्याल, राजकुमार ठुकराल, राजेश शुक्ला, राजकुमार केदार सिंह रावत, मुन्नी देवी, शक्तिलाल शाह, भरत सिंह चौधरी, कैलाश चंद्र गहतोड़ी, नवीन चंद्र दुम्का, जॉर्ज आइवन ग्रेगरीमैन, राम सिंह कैड़ा (निर्दलीय), प्रीतम सिंह पंवार (निर्दलीय)। 

12600 रुपये की कटौती करा रहे भाजपा विधायक

संजय गुप्ता, यतीश्वरानंद, देशराज कर्णवाल, संजीव आर्य। 

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