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देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: देश भर में महंगाई को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवाल पर भाजपा ने उलटा कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस मंहगाई को लेकर गलत बयानबाजी कर रही है। सच्चाई यह है कि खाद्य पदार्थो की महंगाई दर में कांग्रेस सरकार की तुलना में तकरीबन दस गुना तक कमी आई है। उन्होंने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को वैश्विक बाजार से जोड़ते हुए रुपये की गिरती कीमत का कारण भी इसे बताया। 
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि विपक्ष महंगाई के सवाल पर निरंतर भ्रामक बयानबाजी कर रहा है। ऐसे में जनता के बीच सही स्थिति रखी जानी जरूरी है। 
उन्होंने कहा कि एक तबके की नजर में महंगाई का मतलब खाने पीने की वस्तुओं के दाम है। कांग्रेस की जब केंद्र में सरकार थी तब खाद्य पदार्थो की कीमतें काफी अधिक थी। इस दौरान खाद्य पदार्थो की महंगाई दर 13.7 प्रतिशत थी, जबकि अब यह केवल 1.37 प्रतिशत है। इससे साफ है कि खाद्य पदार्थो की कीमतें कम हुई हैं। 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पेट्रोलियम पदार्थो की कीमत पर चीख पुकार मचा रही है। ऐसा दिखाया जा रहा है कि तेल के दाम पर ही संपूर्ण अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। यह दिखाया जा रहा है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत ही आर्थिक तरक्की का मानक है। 
उन्होंने कहा कि यदि रुपये की कीमत कम हुई है तो इसका मतलब यह नहीं कि आर्थिक विकास दर घटी है। भारत की आर्थिक विकास दर बढ़ कर 8.22 प्रतिशत हो गई है। यह विश्व में सबसे तेजी से बढ़ी है। जहां तक रुपये के अवमूल्यन का सवाल है तो कई देश खुद अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करते हैं। चीन ने भी ऐसा किया है। रुपये की कीमत इसलिए कम हुई क्योंकि वैश्विक बाजार में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। तेल खरीदने के लिए डॉलर की जरूरत होती है, डॉलर की डिमांड बढ़ी है इसलिए रुपये की कीमत घटी है। 
उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार जनता पर बोझ डालकर अपनी तिजोरी भर रही है। यह तिजोरी जनता की है। यदि यह भर रही है तो इससे जनता के ही काम हो रहे हैं। सरकार का पैसा गरीबों के काम आ रहा है। यही कारण है कि आज पांच करोड़ से अधिक परिवारों का उज्ज्वला गैस कनेक्शन, 650 जिलों में जननी सुरक्षा योजना, 12 रुपये प्रीमियम पर प्रधानमंत्री दुर्घटना योजना और आयुष्मान भारत योजना के जरिये दस करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये तक की निश्शुल्क स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है।
 

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