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चारधाम यात्रा में भाषा की दीवार तोड़ेगा भाषिणी एप, गढ़वाली-कुमाऊनी समेत 24 भाषाओं में होगा संवाद

Published: Sun, 07 Jun 2026 06:00 AM (IST)

केंद्र सरकार का भाषिणी वाइस एप उत्तराखंड में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच भाषाई बाधाओं को दूर करेगा।

सांकेतिक तस्वीर।

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संक्षेप में पढ़ें

विकास गुसाईं, देहरादून। तमिलनाडु के रामेश्वरम से चारधाम यात्रा पर आए मुरुगन व सोनप्रयाग के होम स्टे संचालक दीवान आमने-सामने हैं। मुरुगन आगे के सफर की जानकारी लेने के साथ ही रुकने के लिए कमरे का किराया जानना चाह रहे हैं।

दिक्कत यह है कि मुरुगन को तमिल के अलावा कोई दूसरी भाषा नहीं आती, जबकि दीवान को गढ़वाली के सिवा कोई अन्य भाषा नहीं।

लेकिन, दीवान के हाथ में समाधान था, सो उन्होंने तुरंत मोबाइल में 'भाषिणी वाइस एप' पर मुरुगन के वाक्यांश को डाला और फिर स्पीकर आन कर गढ़वाली में जवाब दिया।

मोबाइल ने भाषाई परेशानी को दूर किया और दोनों एक-दूसरे की बात समझ गए। इसी प्रकार कोलकाता से आए सुदीप्तो सेन और स्थानीय दुकानदार संजय के बीच भाषिणी एप ने दुभाषिए की भूमिका निभाई।

अब यह संभव होने जा रहा है केंद्र सरकार के भाषिणी एप के जरिये, जिसमें उत्तराखंड के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने देश की 22 भाषाओं के साथ ही राज्य की प्रमुख बोलियों गढ़वाली और कुमाऊनी को भी शामिल किया है।

दरअसल, हर वर्ष देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री एवं पर्यटक उत्तराखंड आते हैं, लेकिन कई बार भाषाई भिन्नता के कारण उन्हें स्थानीय लोगों से संवाद करने, मार्गदर्शन लेने, परिवहन, होटल और अन्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी के दृष्टिगत यह तकनीकी समाधान विकसित किया गया है।

यह है एप की विशेषता

वाइस आधारित इस एप की विशेषता यह है कि कोई भी व्यक्ति अपनी भाषा में बोलकर दूसरी भाषा बोलने वाले व्यक्ति तक अपनी बात आसानी से पहुंचा सकता है।

इससे न केवल पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोग भी अपनी मातृभाषा में संवाद कर सकेंगे। इस पहल से गढ़वाली, कुमाऊंनी बोलियों को मंच मिलने और इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार को भी बल मिलेगा।

इन्हें करेंगे प्रेरित

विभाग की योजना पर्यटन व्यवसाय से जुड़े होटल, होम स्टे संचालकों, टैक्सी चालकों, पर्यटन गाइड और अन्य सेवा प्रदाताओं को इस एप के उपयोग के लिए प्रेरित करने की है। साथ ही प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को भी इसे डाउनलोड करने को जागरूक किया जाएगा।

डिजिटल तकनीक आधारित यह पहल पर्यटन क्षेत्र को अधिक समावेशी व सुविधाजनक बनाएगी। इससे पर्यटक स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुड़ाव महसूस कर सकेंगे। अब जल्द ही एप का ट्रायल किया जाएगा।
- नितेश कुमार झा, सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी

यह भी होगा खास

  • आटोमेटिक स्पीच रिकग्निशन यानी बोलकर कही गई बात को टेक्स्ट में बदलना।
  • न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन के जरिए एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद।
  • टेक्स्ट टू स्पीच यानी लिखे हुए शब्दों को आवाज में बदलना।
  • इसमें आप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन जैसे माडल शामिल हैं।

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