देहरादून, जेएनएन। आयुर्वेद के नाम पर फर्जीवाड़े का काम जोरों पर हो रहा है। कोई चुटकियों में कैंसर दूर करने का दावा कर रहा है तो कोई दस दिन में लंबाई बढ़ाने का भरोसा दे रहा है। पर अब इस तरह के फर्जी विज्ञापनों के जरिये आमजन को भ्रमित नहीं किया जा सकेगा। आयुष मंत्रालय ने इससे सख्ती से निपटने की तैयारी कर ली है।

आयुष मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कैंसर का शर्तिया इलाज, लंबाई बढ़ाने, बाल मजबूत करने, मोटापा घटाने, डायबिटीज को छू मंतर करने वाले भ्रामक विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ऐसा करने पर औषधि निर्माता का अमुक विज्ञापित औषधि का निर्माण लाइसेंस रद कर दिया जाएगा। अधिसूचना के अनुसार अब प्रत्येक आयुर्वेदीय औषधि निर्माता यदि अपनी औषधि का विज्ञापन करना चाहता है तो उसे राज्य सरकार के औषधि लाइसेंस प्रदाता से अनुमति लेनी होगी। मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों से उस आयुर्वेद औषधि निर्माता को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने को कहा है। यह विशिष्ट पहचान संख्या तभी जारी की जाएगी, जब निर्माता यह सुनिश्चित करेगा कि उसका विज्ञापन नियम संख्या 120, औषधि एवं प्रसाधन नियमावली के अनुरूप है। इस अधिनियम में वर्तमान में तरह-तरह के उत्पादों का भ्रामक प्रचार कर रहे निर्माताओं को तीन माह का समय दिया गया है कि वह अपने निर्माण स्थल के राज्य सरकार से विज्ञापन के नियमानुरूप विशिष्ट पहचान संख्या प्राप्त करें और नए विज्ञापन करें। राज्य सरकारों से अपेक्षा की गई है कि वह विज्ञापन के निवेदन का निस्तारण एक माह के भीतर करेगी।

इन स्थितियों में आवेदन होगा रद 

निर्माता का संपर्क पता पूर्ण रूप से नहीं दिया गया है, विषय वस्तु में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अश्लीलता झलकती है, किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या सरकारी अधिकारियों की फोटो दी गई है। सरकार या सरकार के स्वायत संगठन का नाम है और आयुर्वेदीय औषधि के बारे में मिथ्या प्रभाव डालता है। 

मंत्रालय के इस कदम से लोग लाभान्वित होंगे

  • डॉ. वाईएस रावत (औषधि नियंत्रक आयुर्वेद) का कहना है कि आयुर्वेद के नाम पर भ्रामक प्रचार रोकने के लिए यह पहल की गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय के इस कदम से लोग लाभान्वित होंगे। 
  • डॉ. नवीन जोशी (वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी) का कहना है कि आयुर्वेद हर रोगी की परीक्षा कुशल चिकित्सक के निर्देशन में किए जाने को ही उत्तम मानता है। जबकि आज फोन पर भी दवा बताने का दस्तूर चल पड़ा है। इस पर रोक आवश्यक है।

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Posted By: Sunil Negi