देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने शुल्क प्रकरण में सभी निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों को नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने और छात्र-छात्रओं का कक्षाओं में प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश उन्हें दिए हैं। साथ ही छात्रों की उपस्थिति के अभिलेख (उपस्थिति पंजिका) व अनुपालन आख्या विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने को कहा है। ऐसा न करने पर कॉलेज की संबद्धता तक गंवानी पड़ सकती है।

बता दें, आयुर्वेद कॉलेज के छात्र-छात्रएं करीब दो माह से आंदोलित हैं। छात्रों का कहना है कि नैनीताल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी निजी कॉलेज उनसे बढ़ा हुआ शुल्क वसूल रहे हैं। कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और आयुष विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस मामले का त्वरित समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। इस पर आयुष सचिव ने आयुर्वेद विवि को निर्देशित किया था कि निजी कॉलेजों को बढ़ा हुआ शुल्क वापस करने के लिए एक माह का समय दिया जाए। यदि कॉलेज इसके बाद भी निर्देश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। जिस पर विवि की कुलसचिव डॉ. माधवी गोस्वामी ने कॉलेजों को नोटिस जारी किया है। सख्त ताकीद की है कि आदेश का अनुपालन न करने पर उनके खिलाफ विश्वविद्यालय अधिनियम-2009 की धारा 37 (1) के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश भी दिए हैं कि उक्त पत्र को महाविद्यालय की वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा किया जाए। यही नहीं इसका पुष्ट प्रमाण भी विवि को उपलब्ध कराने को कहा है।

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जारी रखा धरना

मुख्यमंत्री ने सख्ती दिखाई और शासन व विवि ने भी उसी सख्त लहजे में निजी कॉलेजों को पत्र जारी कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन न होने पर उन्हें कार्रवाई का डर भी दिखाया है। हद ये कि निजी कॉलेज न सरकार की सुन रहे हैं और न शासन व विवि का आदेश मान रहे। कॉलेज पहुंचे छात्र-छात्रओं को वह बैरंग लौटा रहे हैं। जिसे लेकर छात्रों में गुस्सा है। उनका कहना है कि आंदोलन अब तभी समाप्त होगा, जब कॉलेजों की मनमानी रुकेगी। आयुष छात्र व उनके अभिभावकों ने परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर सोमवार को भी प्रदर्शन जारी रखा। छात्र नेता ललित तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री, शासन व विवि ने पहल जरूर की, पर कॉलेज संचालक अब भी उनका आदेश नहीं मान रहे हैं।

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Posted By: Sunil Negi

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