राज्य ब्यूरो, देहरादून। परिवहन विभाग अब प्रदेश के हर जिले में आटोमेटेड ड्राइवर टेस्टिंग ट्रेक बनाने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद यह है कि चालकों को लाइसेंस जारी करने से पहले लाइसेंस संबंधी सभी परीक्षाएं सही तरह से ली जाएं। इसके साथ ही आटोमेटेड टेस्टिंग लेन की संख्या भी बढ़ाने की तैयारी है ताकि वाहनों की फिटनेस की सही तरह से जांच की जा सके।

प्रदेश में बीते छह माह में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। सड़क दुर्घटनाओं में 52.55 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जांच में एक बात यह सामने आई है कि सबसे अधिक दुर्घटनाएं तेज रफ्तार वाहनों से हो रही हैं। इसमें सबसे अधिक 72 फीसद सड़क दुर्घटनाएं ओवर स्पीडिंग के कारण हो रही हैं। इसके अलावा दुर्घटनाओं में वाहनों की फिटनेस भी एक बड़े कारक के रूप में सामने आई है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव एसएस संधू के निर्देश पर परिवहन मुख्यालय हर जिले में आटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रेक बनाने की तैयारी कर रहा है। अभी केवल देहरादून में भी ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रेक है।

इसलिए यहां लाइसेंस इस ट्रेक में परीक्षा पास करने के बाद ही जारी होते हैं। अन्य जिलों में अभी लाइसेंस आसानी से जारी हो जाते हैं। ऐसे में अब सभी जिलों में आटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रेक बनाने की तैयारी है। हरिद्वार में इसका निर्माण शुरू किया जा रहा है। ऋषिकेश को इसके लिए बजट दे दिया गया है।

टिहरी में टेस्टिंग ट्रेक बनाने के लिए कार्यदायी संस्था ने एस्टीमेट उपलब्ध करा दिया है। इसके अलावा हल्द्वानी व काशीपुर में इसके लिए भूमि चिह्नित है। अब विभाग ने सभी जिलों में अधिकारियों को इसके लिए भूमि तलाश करने को कहा है। इसके साथ ही आटोमेटेड टेस्टिंग लेन बनाने के कार्य को भी गति दी जा रही है। इसके लिए हरिद्वार, हल्द्वानी व ऋषिकेश में टेस्टिंग लेन बनाने का काम जल्द शुरू किया जा रहा है। केंद्र ने इसके लिए धनराशि उपलब्ध कराई है। इसके साथ ही अब अन्य जिलों में भी टेस्टिंग लेन बनाने की कवायद शुरू की जा रही है।

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Edited By: Sunil Negi