देहरादून, राज्य ब्यूरो। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को भी अटल आयुष्मान योजना के दायरे में लाने के लिए सरकार अब कवायद तेज करने जा रही है। इस कड़ी में शासन अब एक बार फिर विभागीय अधिकारियों से मंथन करने के बाद कर्मचारी संगठनों से वार्ता करेगा। मकसद, यह कि सबकी सहमति से इस योजना को धरातल पर उतारा जा सके।

उत्तराखंड सरकार ने बीते वर्ष आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए समस्त प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के उद्देश्य से अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत प्रदेश के हर परिवार को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच दिया गया। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए जो योजना प्रस्तावित की गई उसमें इलाज के खर्च को असीमित रखा गया। इसके लिए लाभ लेने वाले कार्मिक के पद के हिसाब से अंशदान लिए जाने का प्रावधान किया गया। 

प्रदेशवासियों के लिए योजना तो बीते वर्ष ही शुरू कर दी गई थी लेकिन सरकारी कर्मचारी व पेंशनरों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। कारण यह कि कर्मचारी संगठन इसमें कुछ और बदलाव चाहते थे। उनकी मांग सरकारी अस्पताल से रेफरल की अनिवार्यता को समाप्त करने के साथ ही प्रदेश व दूसरे राज्यों के निजी अस्पतालों में सीधे इलाज की सुविधा दिए जाने की थी। इस पर शासन और कर्मचारी संगठनों के बीच कई बार वार्ता भी हुई लेकिन कभी आम सहमति नहीं बन पाई। अब शासन इस दिशा में कदम आगे बढ़ा रहा है। 

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इसके तहत कर्मचारी संगठनों के साथ पूर्व में हुई बैठकों में उठे मामलों पर विभागीय स्तर पर चर्चा की जा रही है ताकि मसले का कोई ठोस हल निकल सके। इसके बाद शासन एक प्रस्ताव तैयार कर कर्मचारी संगठनों के साथ वार्ता करेगा। प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि कर्मचारियों के लिए अटल आयुष्मान योजना के संबंध में विभागीय अधिकारियों संग बैठक की जा रही है। जल्द ही इस मसले पर कर्मचारी संगठनों के साथ भी वार्ता की जाएगी।

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