उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना बनी संजीवनी, 17 लाख मरीजों को मिला मुफ्त इलाज
उत्तराखंड में 'अटल आयुष्मान योजना' ने प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को साकार करते हुए 17 लाख से अधिक मरीजों को ...और पढ़ें

HighLights
17 लाख से अधिक मरीजों को ₹3,400 करोड़ का मुफ्त इलाज मिला।
योजना ने उत्तराखंड के हेल्थकेयर सिस्टम को नई मजबूती प्रदान की।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिला।
पहाड़ के हर नागरिक तक पहुंच रही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा
बदला राज्य का हेल्थकेयर सिस्टम
5 लाख तक का सुरक्षा कवच
उत्तराखंड देश के उन गिने-चुने राज्यों में से एक है, जिसने 'अटल आयुष्मान योजना' के माध्यम से राज्य के सभी परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी है।
दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर इलाज की पहुंच
योजना के कारण बड़े निजी अस्पतालों ने भी अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। पहाड़ के सुदूर गांवों से आने वाले मरीजों को अब इलाज के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता, उन्हें देहरादून, हल्द्वानी और हरिद्वार जैसे शहरों में ही आधुनिक सुपर-स्पेशलिटी इलाज मिल जाता है।
योजना न होती तो घर-जमीन बेचनी पड़ती
पिथौरागढ़ के निवासी मदन सिंह ने कहा कि मुझे हार्ट अटैक आया था और डॉक्टरों ने तुरंत एंजियोप्लास्टी की सलाह दी। निजी अस्पताल में इसका खर्च लाखों में था। मेरे पास इतने पैसे नहीं थे। अटल आयुष्मान कार्ड की बदौलत मेरा पूरा इलाज बिना एक पैसा दिए हो गया। यह योजना हम गरीबों के लिए भगवान का रूप है।
टिहरी की सुनीता देवी ने इस योजना के बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मेरे पति का रीढ़ की हड्डी का बड़ा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर दवाइयों तक का सारा खर्च कार्ड से कवर हुआ। अगर यह योजना न होती तो हमें अपना घर-जमीन बेचना पड़ता।
'अटल आयुष्मान योजना' ने उत्तराखंड में केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं किया है, बल्कि आम जनमानस में यह विश्वास जगाया है कि संकट की घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ यह बदलाव उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर और स्वस्थ राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
