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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Uttarakhand Assembly Monsoon Session: विधानभवन के सभामंडप में ही होगा विधानसभा का मानसून सत्र

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Published: Fri, 18 Sep 2020 10:42 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2020 09:52 AM (IST)

Uttarakhand Assembly Monsoon Session 23 सितंबर से आरंभ होने वाला विधानसभा का मानसून सत्र अब विधानभवन के सभामंडप में ही होगा।

Uttarakhand Assembly Monsoon Session: विधानभवन के सभामंडप में ही होगा विधानसभा का मानसून सत्र
Uttarakhand Assembly Monsoon Session: विधानभवन के सभामंडप में ही होगा विधानसभा का मानसून सत्र

देहरादून, राज्य ब्यूरो। Uttarakhand Assembly Monsoon Session 23 सितंबर से आरंभ होने वाला विधानसभा का मानसून सत्र अब विधानभवन के सभामंडप में ही होगा। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने साफ किया कि सभामंडप में ही सुरक्षित शारीरिक दूरी के मानक समेत कोविड की गाइडलाइन के हिसाब से व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पत्रकार, दर्शक व अधिकारी दीर्घा तक सभामंडप का विस्तार किया गया है। विधानसभा के 107 नंबर कक्ष में भी विधायकों के बैठने की व्यवस्था होगी, जहां से वे वर्चुअली सत्र से जुड़ेंगे। इस बीच विधानसभा की ओर से सभी विधायकों को पत्र भेजकर उनसे सत्र की कार्यवाही से वर्चुअली जुड़ने के संबंध में 21 सितंबर तक सहमति देने का आग्रह किया गया है।

कोरोनाकाल में हो रहे विस के मानसून सत्र को लेकर विधानसभा पिछले कई दिनों से तमाम विकल्पों पर विचार कर रही थी। वजह ये कि सुरक्षित शारीरिक दूरी के मानकों के हिसाब से विधायकों के बैठने की व्यवस्था करने के लिए सभामंडप में जगह कम पड़ रही थी। इस बीच सचिवालय के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में सत्र के आयोजन के संबंध में संभावनाएं तलाशी गईं। अलबत्ता, अब ये तय हो गया है कि सत्र विधानसभा भवन में ही होगा। सुरक्षित शारीरिक दूरी के मद्देनजर सभामंडप को विस्तार दिया गया है। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शुक्रवार को विधायकों के सदन की कार्यवाही से वर्चुअली जुड़ने की व्यवस्थाओं को लेकर एनआइसी के अधिकारियों के साथ बैठक की। 

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सत्र की अवधि को लेकर संशय बरकरार

कोरोना संकट को देखते हुए विस सत्र एक दिन का होगा या फिर यह पूर्व निधारित अवधि तीन दिन चलेगा, इसे लेकर संशय बरकरार है। असल में बीते रोज हुई कैबिनेट की बैठक में इस संबंध में चर्चा हुई थी। अन्य राज्यों के विधानसभा सत्रों का हवाला देते हुए इसकी अवधि एक दिन रखे जाने पर जोर दिया गया था। हालांकि इस बारे में फैसला लेने को मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। 

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