संवाद सूत्र, साहिया: जौनसार-बावर के निचले इलाकों में भी अब सेब से लकदक पेड़ दिखने लगे हैं। हालांकि यह वह क्षेत्र है, जहां पर कभी बर्फबारी नहीं होती और न ही चीलिग प्वाइंट विकसित होता है। पहली बार कोरुवा और कोठा तारली गांवों में सेब उत्पादन सफलता से किया जा रहा है। यहां लगे सेब बगीचों में इस बार फल लगे हुए हैं। स्पर प्रजाति के सेब बगीचों में फल देखने उद्यान विभाग के अधिकारी भी पहुंचे। उन्होंने एप्पल मिशन योजना के तहत लगे बगीचों में सेब देखकर बागवानों की सराहना की।

सेब उत्पादन के लिए बर्फबारी वाले इलाके को उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि सेब के उत्पादन के लिए चीलिग प्वाइंट विकसित होना अनिवार्य है। जौनसार के ऊंचाई वाले इलाकों में तो सेब के बगीचे पहले से विकसित थे, जहां के सेब की बात ही कुछ और है। निचले इलाके के दो बागवानों ने प्रयोग के तौर पर ऐसे स्थान पर सेब बगीचे विकसित किए, जहां पर न तो बर्फ पड़ती है और मौसम भी मैदानी इलाकों की तरह गर्म ही रहता है। पहली बार प्रयोग के तौर पर लगाए सेब बगीचों के सुखद परिणाम सामने आने लगे हैं। किसानों ने परंपरागत खेती से हटकर कुछ अलग करने की सोची। साहिया क्षेत्र के कोरूवा गांव के बुध सिंह तोमर और कोठा तारली गांव के खजान सिंह तोमर ने पहली बार सेब का बगीचा तैयार किया। कोरुवा निवासी बुध सिंह तोमर के बगीचे में सेब से लदे पेड़ हर बागवान को आकर्षित कर रहे हैं। साथ ही साहिया क्षेत्र के किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा दे रहे हैं। साहिया क्षेत्र में पहली बार सेब की बागवानी सफल हुई है, जबकि साहिया क्षेत्र में तापमान अधिक होता है और न ही बर्फबारी पड़ती है। बुध सिंह तोमर और खजान सिंह तोमर की गांव के पास ही जमीन है, जिसमें उन्होंने सेब की जेरोमाइन, गाला, रेडविलोक्स, स्कारलेट प्रजाति के पौधे रोपे थे। उद्यान विभाग साहिया से एप्पल मिशन योजना के तहत लगे सेब बगीचों में फल आने से बागवानों का मनोबल भी बढ़ा है। उद्यान विभाग के एडीओ राम कुमार और ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक सतपाल सिंह नेगी ने कहा कि विभाग से बागवानी के लिए हर तरह की योजना है। निरीक्षण में कोरूवा गांव में बुध सिंह तोमर के सेब बगीचे में पहुंचे, वहां पर सेब काफी संख्या में लगे मिले, जो अच्छा प्रयास है।

Edited By: Jagran