राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड में कृषि उत्पाद (विकास एवं विनियमन) अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र सरकार के एग्रीकल्चर प्रोडयूज लाइवस्टॉक मार्केटिंग (एपीएलएम) एक्ट को अपनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसका मसौदा तैयार हो रहा है। एपीएलएम के लागू होने से राज्य में फल-सब्जी पर मंडी शुल्क नहीं लगेगा और मंडियों में स्थित दुकानों से यूजर चार्ज लिया जाएगा। इस बीच वित्त विभाग ने मंडी शुल्क खत्म करने पर होने वाले नुकसान समेत अन्य बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। सूत्रों ने बताया कि वित्त और न्याय विभाग से परामर्श के बाद एपीएलएम का प्रस्ताव कैबिनेट में आएगा। कोशिश यह है कि गैरसैंण में होने वाले बजट सत्र के दौरान इसे सदन में पेश कर पारित करा लिया जाए।

किसानों की आय दोगुना करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एपीएलएम मॉडल एक्ट तैयार कर सभी राज्यों को इसे लागू करने को कहा है। ये व्यवस्था दी गई है कि एपीएलएम लागू न करने वाले राज्यों को 15 वें वित्त आयोग से इस मद में ग्रांट नहीं मिलेगी। इसे देखते हुए उत्तराखंड में भी इसे अपनाने के मद्देनजर शासन स्तर पर कसरत शुरू हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। वित्त विभाग ने एपीएलएम अपनाने से होने वाली क्षति, इसकी भरपाई समेत अन्य बिंदुओं पर जानकारी कृषि विभाग से मांगी है। एक-दो दिन में वित्त विभाग को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। इसके बाद न्याय विभाग से परामर्श लेकर एपीएलएल का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

मंडी शुल्क से 9.50 करोड़ का नुकसान

मंडियों में फल-सब्जी पर लिए जाने वाले डेढ़ फीसद मंडी शुल्क (एक फीसद मंडी शुल्क व आधा फीसद विकास सेस) के खत्म होने से करीब 9.50 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। यदि खाद्यान्न को भी इसमें शामिल किया गया तो यह राशि कहीं अधिक हो सकती है।

जहां ज्यादा दाम वहीं बेचेंगे उत्पाद

एपीएलएम लागू होने पर फल-सब्जी पर मंडी शुल्क समाप्त होने के साथ ही आढ़ती लाइसेंस की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। यानी कारोबार की बंदिशे खत्म हो जाएंगी। साथ ही किसान अपने उत्पादों को वहां बेच सकेंगे, जहां अधिक दाम मिलेंगे। उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध होंगे।

वजूद में रहेंगी मंडी समितियां

एपीएलएल एक्ट लागू होने पर भी मंडी समितियों का वजूद बना रहेगा। मंडी समितियों में जितनी भी दुकानें हैं, उनमें कारोबार करने वालों से यूजर चार्ज लिया जाएगा। हालांकि, सरकारी स्तर पर नई मंडियों की राह कठिन हो जाएगी।

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'एपीएलएम एक्ट का विधिवत प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इस पर निर्णय सरकार को लेना है। इस एक्ट के लागू होने से किसान और उपभोक्ता दोनों को ही फायदा मिलेगा।'

-आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव कृषि

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