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अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने दोषियों की जमानत याचिकाएं की खारिज, सरकार की मजबूत पैरवी रंग लाई

Published: Thu, 20 Aug 2026 07:50 AM (IST)

अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सभी दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जो सरकार की मजबूत पैरवी ...और पढ़ें

अंकिता भंडारी हत्याकांड । जागरण

अंकिता भंडारी हत्याकांड । जागरण

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कीं।

  2. मुख्यमंत्री धामी की दृढ़ता और सरकार की मजबूत पैरवी का असर दिखा।

  3. त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच और प्रभावी अभियोजन से मिली उम्रकैद।

राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्तर से शुरुआत से दिखाई गई दृढ़ता और सरकार की मजबूत पैरवी का असर एक बार फिर सामने आया है। बुधवार को हाईकोर्ट ने हत्याकांड में जेल की सजा काट रहे सभी दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

घटना के तत्काल बाद अभियुक्तों की गिरफ्तारी से लेकर एसआइटी जांच, मजबूत चार्जशीट और प्रभावी अभियोजन तक सरकार ने मामले को प्राथमिकता में रखा। इसी का परिणाम रहा कि तीनों अभियुक्तों को मुकदमे के दौरान जमानत नहीं मिल सकी और उन्हें उम्रकैद की सजा हुई।

अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद से ही सरकार इस मामले में सख्त रवैया अपनाए हुए है। घटना के बाद बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। 24 घंटे के भीतर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एसआइटी गठित की गई। आरोपितों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। जांच में करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार हुई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल किए गए।

मुख्यमंत्री धामी ने मामले में पीड़ित परिवार की भावनाओं को भी प्राथमिकता दी। स्वजन की मांग पर तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। माता-पिता की ओर से सीबीआइ जांच की मांग किए जाने पर सरकार ने सीबीआइ जांच की संस्तुति भी की। सरकार ने परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही अंकिता के पिता और भाई को नौकरी भी दी है। सरकार की ओर से न्यायालय में लगातार प्रभावी पैरवी की गई।

इसके चलते जेल में सजा काट रहे दोषियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज होती रहीं। मजबूत जांच और अभियोजन के परिणामस्वरूप दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। मुख्यमंत्री धामी ने घटना के बाद स्पष्ट किया था कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाया जाएगा। त्वरित गिरफ्तारी से लेकर एसआइटी जांच, चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट, मजबूत अभियोजन, परिवार की मांगों पर निर्णय और आर्थिक सहायता व रोजगार तक उठाए गए कदमों को सरकार इसी संकल्प का हिस्सा मानती है।

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'वीआइपी' मामले में सरकार का जवाब
मामले में कथित 'वीआइपी' को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों की ओर से उठाए गए सवालों पर सरकार ने कहा कि यदि किसी के पास ठोस तथ्य या साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि अंकिता प्रकरण में न्याय सुनिश्चित करना राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि जांच, साक्ष्य और न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है।