राज्य ब्यूरो, देहरादून: प्रदेश सरकार अब सभी प्रमुख पर्यटन व धार्मिक स्थलों के लिए वैकल्पिक मार्ग की तलाशने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए पुराने संपर्क मार्गों को भी चिह्नित किए जा रहा है। मकसद यह कि प्रमुख मार्ग के क्षतिग्रस्त होने पर यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इन वैकल्पिक मार्गों से आवाजाही सुचारू रखी जा सके। आपदा की स्थिति में भी राहत बचाव कार्यों के लिए ये मार्ग काम आ सकेंगे।

उत्तराखंड आपदा के लिहाज से संवेदनशील राज्य है। विशेष रूप से बरसात में यहां आपदा की आशंका रहती है। प्रदेश के अधिकांश धार्मिक व पर्यटन स्थान पर्वतीय क्षेत्रों में हैं। यहां पहुंचने वाले मार्गों पर भूस्खलन का खतरा बना रहता है। वर्ष 2013 में आई आपदा के दौरान भी प्रदेश में कई राष्ट्रीय व राज्य मार्ग बंद हो गए थे। इस दौरान वैकल्पिक मार्गों के जरिये ही आवाजाही हुई और राहत बचाव के कार्य भी संपन्न कराए गए। केदारनाथ में आई आपदा के दौरान भी गुप्तकाशी-मयाली मार्ग ने यहां फंसे हुए व्यक्तियों को निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा कई अन्य ऐसे मार्ग भी हैं जिनका इस्तेमाल नए मार्गों के बनने के कारण नहीं होता। ऐसा ही उत्तरकाशी जाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उत्तरकाशी-लंबगांव मार्ग है।

इसका इस्तेमाल गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग पर धरासू व नगूणी बैंड पर भूस्खलन होने से मार्ग बंद होने की स्थिति में किया जा सकता है। ऐसे ही वैकल्पिक मार्ग मसूरी, नैनीताल, पौड़ी के लिए भी हैं। भले ही ये मार्ग थोड़े लंबे हैं लेकिन मुख्य मार्गों के बंद होने की स्थिति में इनका इस्तेमाल यात्रियों को निकालने के लिए किया जा सकता है। चारधाम आल वेदर रोड पर भी तोताघाटी में लगातार हो रहे भूस्खलन को देखते हुए वैकल्पिक मार्ग की तलाश की जा रही है। मकसद यह कि इन्हें दुरुस्त किया जाए ताकि आपात स्थिति में इनका उपयोग होता रहे।

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लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि सभी प्रमुख स्थलों को जाने वाले मार्गों के वैकल्पिक मार्ग तलाश किए जा रहे हैं ताकि इन्हें दुरुस्त कर यातायात संचालन के योग्य बनाया जा सके। इससे आपदा व भूस्खलन की स्थिति में यात्रियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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Edited By: Sumit Kumar