देहरादून, अशोक केडियाल। इंजीनियरिंग के शिक्षकों और छात्रों को शोध के लिए आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) ने शोध ग्रांट योजना लॉन्च की है। इसका फायदा उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) परिसर और संबद्ध कॉलेजों के छात्रों व शिक्षकों को मिलेगा। इसके लिए सालभर ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। 

एआइसीटीई की इस योजना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध को बढ़ावा मिलेगा। बीटेक, एमटेक, बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) और मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग (एमई) सहित एआइसीटीई के दायरे में आने वाले पाठ्यक्रम के छात्रों और शिक्षकों को भी इसका फायदा मिलेगा। यह योजना चार श्रेणियों में तैयार की गई है। 

अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस को पांच लाख अभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस तो होती है, लेकिन सामान्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस या सेमीनार कम ही होते हैं। अब इसके लिए भी संबंधित संस्थान को पांच लाख की ग्रांट मिलेगी, जिससे विदेशी शिक्षक और छात्र यहां आएं। इससे मध्यम स्तर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। 

विदेश जाने पर छात्र ग्रुप को 10 लाख 

दूसरी योजना में छात्रों के ग्रुप को शोध पेपर प्रेजेंटेशन के लिए विदेश जाने पर 10 लाख तक मिलेंगे। दो से 10 छात्र जाएंगे तो हर छात्र को एक-एक लाख की ग्रांट मिलेगी। 10 से ज्यादा छात्र होने पर भी ग्रांट अधिकतम 10 लाख ही रहेगी। 

शिक्षकों को विदेश जाने पर डेढ़ लाख 

तीसरी योजना इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए हैं। जो शिक्षक शोध में अच्छा काम कर रहे हैं और उन्हें शोध पेपर प्रेजेंटेशन के लिए किसी अन्य देश से बुलावा आता है तो इसके लिए डेढ़ लाख की ग्रांट मिलेगी, ताकि शोध के लिए शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका मिले। 

छात्र को विदेश जाने पर एक लाख 

चौथी योजना छात्रों के लिए है। किसी भी इंजीनियरिंग कोर्स का कोई छात्र अगर किसी अन्य देश में शोध पेपर प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया जाता है तो उसे भी एक लाख की ग्रांट मिलेगी। यह स्कीम इसलिए भी अहम है, क्योंकि कई देशों में इंजीनियरिंग से जुड़ी कार्यशाला और सेमीनार होते हैं, जिनमें ज्यादातर छात्र आर्थिक और तकनीकी कारणों से शामिल नहीं हो पाते हैं। 

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प्रदेश के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज 

उत्तराखंड तकनीकी विवि से संबद्ध 98 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 11 हजार से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं। जिसमें आठ राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं। 

- जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज पौड़ी 

- विपिन त्रिपाठी आइटी कॉलेज द्वारहाट 

- कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी पंतनगर 

- एपीजे अब्दुल कलाम आइटी टनकपुर 

- टीएचडीसी आइएचईटी टिहरी गढ़वाल 

- नन्हीं परी एसआइटी पिथौरागढ़ 

- इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोपेश्वर 

- महिला प्रौद्योगिक संस्थान, देहरादून।

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यूटीयू के पीएचडी कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. अंबरीश एस विद्यार्थी ने बताया कि इससे उत्तराखंड के इंजीनियरिंग कॉलेजों में गुणवत्ता परख शोध को लेकर स्पर्धा बढ़ेगी। इंजीनियरिंग के छात्रों और शिक्षकों को सूबे के शोध और नवाचार को दुनिया के सामने लाने का मौका मिलेगा। एआइसीटीई की पहल स्वागत योग्य है।

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Posted By: Raksha Panthari

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