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हिमालय में आपदा का पूर्वानुमान लगाने में मददगार होगा एआई, दून विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:07 AM (IST)

दून विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिमालयी आपदाओं के पूर्वानुमान और प्रभाव को कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर चर्चा हुई।

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HighLights

  1. हिमालयी आपदा पूर्वानुमान में एआई की मदद पर जोर।

  2. सतत विकास में समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण बताई गई।

  3. दून विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।

जागरण संवाददाता, देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में आपदा के खतरे का पूर्वानुमान लगाने और उनके प्रभाव को कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जा सकती है। तकनीक का इस्तेमाल स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप करना होगा। साथ ही सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ पर यह बात कही।

‘बदलती जलवायु में हिमालय आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हिमालय की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदाओं का आकलन, संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान और जोखिम कम करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग जरूरी है।

दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और आईएआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक निदेशक प्रो. अमित सेठ ने ‘स्माल एआई’ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में सुलभ और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित कर भारत की विशिष्ट विकास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त सचिव डा. निशांत वर्मा ने दून विवि में विकसित हो रहे शोध के माहौल की सराहना की।

शोध और नियोजन में एआई के इस्तेमाल पर चर्चा

कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विवि की शैक्षणिक और शोध संबंधी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रयासों से अनुसंधान गतिविधियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। संगोष्ठी में दिल्ली विवि, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की समेत विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधार्थी और दून विवि के शिक्षक शामिल हुए। संगोष्ठी के संयोजक एवं भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डा. विपिन कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।