देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संघर्ष समिति, राज्य निर्माण सेनानी मंच व अन्य राज्य आंदोलनकारी संगठनों से जुड़े राज्य आंदोलनकारियों व सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मुजफ्फरनगर कांड की 25वीं बरसी पर कचहरी स्थित शहीद स्मारक पर पहुंचकर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। ढाई दशक बाद भी दोषियों को सजा न मिलने से नाराज राज्य आंदोलनकारियों ने ‘धिक्कार दिवस’ मनाया। कहा अब तक की सरकारों की नीतियों के कारण ही रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को सजा नहीं मिली है। यह सभी सरकारों के लिए धिक्कार है।

राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि पृथक राज्य की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली कूच कर रहे राज्य आंदोलनकारियों व मातृशक्ति पर उप्र की तत्कालीन मुलायम सरकार ने जो बर्बरता की वह इतिहास का काला दिन है। सरकार के निर्देश पर यूपी की पुलिस ने आधी रात को निहत्थे राज्य आंदोलनकारियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। मातृशक्ति के साथ बर्बरता की गई। कहा कि तत्कालीन सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों पर हिंसा उस दिन की, जब समूचे देश में शांति व अहिंसा के दूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती बनाई जा रही थी। 

आंदोलनकारियों ने कहा कि अफसोस कि अब तक रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को सजा नहीं मिली है। यह अब तक भी सभी सरकारों की नाकामी को भी प्रदर्शित करता है। क्योंकि किसी भी सरकार ने दोषियों को सजा दिलाने के लिए न्यायालय में ठोस पैरवी नहीं की है। जबकि सरकारें बनाने या बचाने के लिए चंद घंटों में न्याय मिल जाता है। 

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राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि दो अक्टूबर का दिन सरकारों के लिए धिक्कार दिवस है। श्रद्धांजलि सभा में राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशील बलूनी, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान, प्रदीप कुकरेती, रामलाल खंडूड़ी, निर्मला बिष्ट, ऊषा नेगी, शकुंतला गुसाईं, चंद्रमोहन नेगी, प्रभात डंडरियाल, जीतपाल बड़थ्वाल, केशव उनियाल, अरविंद गुप्ता, आरिफ वारसी, प्रवीन शर्मा, राजकुमार बत्र, अरुण खरबंदा आदि शामिल रहे। 

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Edited By: Bhanu