जागरण संवाददाता, देहरादून। बस चालकों की कमी से जूझ रहे रोडवेज को आउट सोर्स एजेंसी ने तगड़ा झटका दे दिया है। एजेंसी ने रोडवेज से अपना करार तोड़ते हुए उसकी ओर से उपलब्ध कराए चालकों को वापस करने को कहा है। आरोप है कि रोडवेज चालकों को न तो वेतन दे रहा और न ही उनका ईपीएफ जमा किया जा रहा है। इस कारण चालक एजेंसी में हंगामा कर रहे और संचालकों को परेशान कर रहे। एजेंसी ने 31 जुलाई तक अपनी सेवा देने की बात कही है।

तीन साल पहले सरकार के आदेश पर चालकों की कमी दूर करने के लिए रोडवेज ने आउट सोर्स के जरिये चालक भर्ती किए थे। जेड सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमि. से रोडवेज प्रबंधन ने करार किया। एजेंसी ने 77 चालक रोडवेज को उपलब्ध कराए हुए हैं, जबकि जरूरत के अनुसार समय-समय पर अतिरिक्त चालक उपलब्ध कराती रहती है। अब एजेंसी के प्रबंध निदेशक की ओर से रोडवेज के महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन को पत्र भेजकर सेवा देने में अस्मर्थता जताते हुए करार खत्म करने की बात कही है।

एजेंसी का आरोप है कि रोडवेज प्रबंधन ने उनके चालकों को फरवरी से अभी तक का वेतन नहीं दिया है। एजेंसी का आरोप है कि रोडवेज प्रबंधन ने अनुबंध के समय नवंबर-2019 से अब तक जीएसटी समेत नियोक्ता की ओर से 13 फीसद ईपीएफ में जमा किए जाने वाला अंशदान भी एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराया। पिछले साल हुए कोरोना लाकडाउन के दौरान रोडवेज प्रबंधन ने चालकों को सांत्वना राशि देने का भरोसा दिया था, लेकिन वह भी नहीं दिया।

एजेंसी के अनुसार इस कारण चालक रोज आफिस में आकर गाली-गलौज व हंगामा कर रहे। एजेंसी ने 31 जुलाई तक सेवा देने की बात कही है और रोडवेज से प्रति चालक एजेंसी की ओर से जमा की गई पांच हजार रुपये की सुरक्षा राशि भी वापस मांगी है। रोडवेज महाप्रबंधक दीपक जैन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नई एजेंसी का चयन किया जा रहा है। तब तक पुरानी एजेंसी से काम करने का आग्रह किया गया है।

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Edited By: Sunil Negi