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देहरादून, जेएनएन। साल 2008 से अपनी पेंशन और ग्रेच्युटी की लड़ाई लड़ रहे सिंचाई विभाग के रिटायर जेई का अब जाकर न्याय मिला है। सेवा प्राधिकरण बोर्ड ने हाल ही में ग्रेच्युटी, अवैध ढंग से काटी गई रकम और बकाया पेंशन देने के आदेश दिए है। 

मूल रुप से बुलंदशहर के खुर्जा निवासी महेश चंद्र अग्रवाल ने 15 नवंबर 1966 को सिंचाई खंड प्रयागराज में नौकरी ज्वाइन की थी। 20 दिसंबर 1976 को उनका तबादला मनेरी भाली उपनिवेश खंड ऋषिकेश में हो गया। उन्होंने बताया कि 2006 में ईई ने स्टोर से करीब तीन-चार लाख के चार सामान कम होने की बावत उन्हें पत्र लिखा था। उन्होंने ईई से इस सामानों के अभिलेख मांगे जिससे उक्त सामान की जांच हो सके। लेकिन ईई ने कोई अभिलेख उन्हेें उपलब्ध नहीं कराया।

30 अप्रैल 2008 को वह मनेरी भाली सुरंग निर्माण खंड चिन्याली सौड़ से रिटायर हो गए। स्टोर से सामान कम होने के आधार पर उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोक दी गई। जब उन्होंने विभाग से गुहार लगाई तो इसके लिए वर्ष 2009 में  एक कमेटी गठित कर दी गई। कमेटी ने चार सामान में एक सामान एडजस्ट होने और बाकी के लिए रिसीविंग चालान पेश करने के लिए समय दिए जाने की रिपोर्ट दी। फिर भी मामला नहीं सुलझा। उसके बाद अग्रवाल ने जुलाई 2012 में लोकायुक्त से गुहार लगाई।

लोकायुक्त ने मार्च 2013 में सिंचाई विभाग को छह हफ्ते में पेंशन देने के आदेश दिए। इस पर विभाग ने फिर से कमेटी गठित की। इस कमेटी ने चार में से एक सामान का संज्ञान नहीं लिया। बाकी तीन में से दो सामान के चालान नहीं दिखाने की बात कही। उसके बाद उक्त सामान की कुल कीमत 3,71,838 रुपये ग्रेच्युटी से काट कर वर्ष 2013 में पेंशन दे दी। जो पेंशन उन्हें दी गई वह जेई के ग्रेड पे पर दी गई जबकि वह ईई के ग्रेड पे पर थे। उन्होंने इसका विरोध करते हुए जनवरी 1996 से ईई ग्रेड पे का बकाया वेतन और बढ़ी हुई पेंशन देने की गुहार लगाई।

पांच साल जब उन्हें विभाग से न्याय नहीं मिला तो उन्होंंने दिसंबर 2018 में सेवा प्राधिकरण बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई। जस्टिस यूसी ध्यानी और जस्टिस राजीव गुप्ता की कोर्ट ने 351 ए धारा का हवाला देते हुए जेई के पक्ष में फैसला सुनाया। सिंचाई विभाग को 12 हफ्तों में ग्रेच्युटी से काटी रकम, बकाया पेंशन एवं ग्रेच्युटी का ब्याज सहित भुगतान के आदेश दिए हैं। 

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Posted By: Raksha Panthari

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