जागरण संवाददाता, देहरादून। लगातार हो रही कौओं की मौत के बाद अब अन्य पक्षियों के मृत पाए जाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हालांकि, अभी उत्तराखंड में किसी अन्य पक्षी में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन, वन विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर तमाम हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इसमें सबसे अहम वेटलैंड और झीलों की निगरानी है। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदों के पहुंचने के कारण वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। इसे देखते हुए कार्मियों को अलर्ट रहने के निर्देश तो दिए ही गए हैं, ड्रोन के माध्यम से भी प्रवासी पक्षियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, अभी केवल ऊधमसिंह नगर में ही ड्रोन से निगरानी की जा रही है, लेकिन जल्द ही अन्य जिलों में स्थित वेटलैंड और झीलों में भी ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 

बर्ड फ्लू को लेकर प्रवासी पक्षियों की निगरानी के साथ ही शिकारियों पर नकेल कसने में भी ड्रोन से मदद मिलेगी। अब आसन और झिलमिल में भी जल्द ही ड्रोन मंडराते नजर आएंगे। केंद्र सरकार की ओर से बर्ड फ्लू को लेकर जारी की गई एडवाइजरी के बाद वन विभाग सभी संसाधनों से इस पर कार्य कर रहा है।

प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी ने बताया कि ऊधमसिंह नगर के खटीमा के जलाशयों में प्रवासी पक्षियों की ड्रोन से मॉनिटरिंग की जा रही है। तराई पूर्वी वन प्रभाग में बैगुल झील, धौरा झील, नानक सागर और शारदा सागर जलाशय में इन दिनों सैकड़ों की संख्या में मध्य एशिया से प्रवासी परिंदे पहुंचे हुए हैं। जबकि, आसान और झिलमिल वेटलैंड में भी उत्तरी अफ्रीका के पक्षी प्रवास पर हैं। ऐसे में एवियन इन्फ्लूएंजा के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। 

इसी कारण पूर्वी वन प्रभाग के जलाशयों में विदेशी प्रवासी पक्षियों की ड्रोन से मॉनिटरिंग की जा रही है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि सप्ताह में दो दिन प्रवासी पक्षियों की मॉनिटरिंग ड्रोन से की जा रही है। जिसमें क्षेत्र की एरियल विडियोग्राफी व फोटोग्राफी कर सघन विश्लेषण को टीम तैनात की गई है। राज्य में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि में फैले छोटे-बड़े 994 वेटलैंड चिह्नित किए गए हैं। इनमें 97 ऐसे हैं, जो वन क्षेत्र से बाहर हैं।

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