देहरादून, जेएनएन। दून में बढ़ रही जमीनों की धोखाधड़ी पर जिलाधिकारी के सख्त रुख अपनाने के बाद भी अधिकारी चेत नहीं रहे हैं। जिलाधिकारी के संज्ञान में ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है। मसूरी के पास क्यारकुली भट्टा में जो 795 बीघा भूमि भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आइटीबीपी) के कब्जे में है, उसकी खतौनी में किसी अन्य व्यक्ति का नाम चढ़ा है। अब इस मामले में जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने पत्रावली तलब की है।

आइटीबीपी की इस भूमि पर पूर्व खातेदार रघुप्रताप का नाम चला आ रहा है। लिहाजा, इन्हीं रिकॉर्ड के नाम पर आइटीबीपी की भूमि खुर्द-बुर्द की जाने लगी थी। अगस्त 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी (अब मंडलायुक्त) रविनाथ रमन ने यह मामला पकड़ा था। इस फर्जीवाड़े में मुकदमा कायम कर कई व्यक्तियों को जेल भेजा गया था। साथ ही खतौनी से रघुप्रताप का नाम खारिज कर आइटीबीपी का नाम चढ़ा दिया था। इस आदेश के खिलाफ रघुप्रताप ने अक्टूबर 2016 में ही हाईकोर्ट से स्टे लिया था।

बंदोबस्त कार्यालय के अधिकारियों ने तब झटपट खतौनी पर हाईकोर्ट का आदेश चढ़ाकर रघुप्रताप का नाम बहाल कर दिया था। हालांकि, वर्ष 2017 में हाईकोर्ट ने स्टे वापस लेकर जिलाधिकारी के आदेश को बहाल कर दिया था। गंभीर यह कि बंदोबस्त अधिकारियों ने स्टे खारिज होने की बात को खतौनी में दर्ज ही नहीं किया। जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। आइटीबीपी की भूमि संबंधी पत्रावली तलब की गई है और तहसीलदार को खतौनी में हाईकोर्ट के ताजा आदेश को चढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी देखा जा रहा है कि किन कार्मिकों की लापरवाही के चलते खतौनी में दोबारा आइटीबीपी का नाम नहीं चढ़ पाया। आइटीबीपी के कब्जे वाली भूमि से अतिरिक्त भूमि पर अगर इन कागजों से रजिस्ट्री की गई है तो सभी को खारिज किया जाएगा।

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तहसीलदार सदर दयाराम का कहना है कि मैंने हाल ही में सदर क्षेत्र का पदभार ग्रहण किया है। मुझे अभी इस मामले की जानकारी नहीं है। अगर अधीनस्थ बंदोबस्त कार्यालय से किसी तरह की चूक की गई है तो उसे दुरुस्त कर दोषी कार्मिकों को चिह्नित किया जाएगा।

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