देहरादून, जेएनएन। जनपद देहरादून पर कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर दिन राज्य में सर्वाधिक मरीज दून में ही मिल रहे हैं। बुधवार को भी जिले में 429 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सितंबर में दून में 4735 नए मामले आ चुके हैं। यही नहीं कुल मरीजों का आंकड़ा भी नौ हजार पहुंच चुका है। न केवल शहर बल्कि ऋषिकेश से लेकर पछवादून तक में हर दिन बड़ी संख्या में मामले मिल रहे हैं। विकासनगर के एक बैंक मैनेजर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दून में रहने वाले बैंक मैनेजर की तबीयत ठीक न होने पर चिकित्सकों ने कोविड टेस्ट कराने की सलाह दी थी। वहीं तेलपुर में डेंटिस्ट के परिवार के तीन सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं विकासनगर में ही अमर विहार कॉलोनी में एक ही परिवार के तीन सदस्य संक्रमित पाए गए हैं। अब तक जिले में कुल 8820 लोग संक्रमित हो चुके हैं, इनमें 4939 स्वस्थ हो गए हैं।

नहीं होगी जांच

दून मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब में गुरुवार को जांच नहीं होगी। लैब को एक दिन के लिए बंद रखा जाएगा। इस दौरान यहां सैनिटाइजेशन का कार्य किया जाएगा। लैब में जांच बंद होने के कारण दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में होने वाला सैंपलिंग का कार्य भी गुरुवार को बंद रहेगा।

आयुष किट की मांग

देहरादून में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले कोरोना योद्धाओं ने आयुर्वेद विभाग से आयुष किट उपलब्ध कराने की मांग की है। सैंपलिंग टीम में शामिल चिकित्सकों व स्टाफ ने इस संदर्भ में जिला आयुर्वेद अधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि वह लोग हाई रिस्क पर काम कर रहे हैं। क्वारंटाइन सेंटर, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट समेत अन्य जगह पर नियमित सैंपलिंग का कार्य कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने नहीं दिया सैंपल, टीम लौटी

रुद्रप्रयाग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम सैंपल लेने तो जा रही हैं, लेकिन ग्रामीणों के जांच से इन्कार करने पर उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। बुधवार को भी जब स्वास्थ्य विभाग की टीम सैंपलिंग के लिए केदारघाटी के फली फसालत गांव पहुंची तो मात्र आठ ग्रामीण ही जांच को तैयार हुए। बीते दिनों भी ऊखीमठ में देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारियों के संक्रमित पाए जाने पर 104 में से मात्र चार व्यक्तियों ने ही जांच कराई थी।

शासन-प्रशासन स्तर से भले ही कोरोना संक्रमण रोकने को अधिक से अधिक सैपलिंग के दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि लोग जांच कराने को ही तैयार नहीं।

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बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम केदारघाटी के फली फसालत गांव पहुंची। यहां ग्राम प्रधान हरीश तिवारी समेत निगरानी समिति ने ग्रामीणों को जांच के लिए मनाने का प्रयास किया। लेकिन, मात्र आठ लोग ही कोरोना जांच कराने को तैयार हुए। इस स्थिति से खिन्न ग्राम प्रधान तिवारी ने कहा कि भविष्य में यदि गांव का कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी स्वयं की होगी। उधर, सीएमओ का कहना है कि ग्रामीणों को भी जांच के लिए जागरूक किया जा रहा है। 

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