जागरण संवाददाता, ऋषिकेश :

तीर्थनगरी व आसपास का क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी से जूझ रहा है। दिन के समय पारा 41 डिग्री सेल्सियस को छूने लगा है। लू के थपेड़ों के बीच सूरज की तपिस आसमान से आग की तरह बरस रही है। भीषण गर्मी से मनुष्य ही नहीं जानवर भी बेहल हैं।

पिछले एक पखवाड़े से तीर्थनगरी क्षेत्र में मौसम का पारा आसमान चढ़ रहा है। आलम यह है कि दिन चढ़ने से पहले ही दोपहर में पड़ने वाली प्रचंड गर्मी का अहसास होने लगता है। सूर्योदय के साथ ही पारा चढ़ने लगता है और दोपहर तक अपने चरम पर पहुंच जाता है। आलम यह है कि दोपहर में घर व दफ्तरों से बाहर निकलने की भी हिम्मत लोग नहीं जुटा पा रहे हैं। इस पूरे सप्ताह पारा जहां 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे उतरने का नाम नहीं ले रहा था, पिछले दो दिनों से पारा 41 डिग्री सेल्सियस पहुंच रहा है। हालांकि चारधाम यात्रा व पर्यटन काल होने के कारण सड़कों पर वाहनों की आमद बनी हुई है, मगर दोपहर में गर्मी के कारण बाजार में सन्नाटा पसरा रहता है। भीषण गर्मी में बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। गर्मी में होने वाली बीमारियां डी हाईड्रेशन, लू, डायरिया, आंखों में जलन, चर्म रोग, एनर्जी लॉस, हिट स्ट्रेस आदि से पीड़ित लोग चिकित्सकों के पास उपचार को पहुंच रहे हैं।

सावधानियां बरत कर लू और गर्मी से बचें

- तेज गर्म हवा में बाहर जाने से बचें। नंगे बदन और नंगे पैर धूप में न निकलें

- घर से बाहर पूरी आस्तीन के और ढीले कपड़े पहनकर निकलें, ताकि उनमें हवा लगती रहे

- ज्यादा टाइट और गहरे रंग के कपड़े न पहनें

- सूती कपड़े पहनें। सिथेटिक, नायलॉन और पॉलिएस्टर के कपड़े न पहनें

- खाली पेट घर से बाहर न जाएं और ज्यादा देर भूखे रहने से बचें

- धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, सिर पर गीला या सादा कपड़ा रखकर चलें

- चश्मा पहनकर बाहर जाएं। चेहरे को कपड़े से ढक लें

- घर से पानी या कोई ठंडा शरबत पीकर निकलें, जैसे आम पना, शिकंजी, खस का शर्बत आदि। साथ में पानी की बोतल लेकर चलें

- बहुत ज्यादा पसीना आया हो तो फौरन ठंडा पानी न पीएं। सादा पानी भी धीरे-धीरे करके पीएं

- रोजाना नहाएं और शरीर को ठंडा रखें

- घर को ठंडा रखने की कोशिश करें। खस के पर्दे, कूलर आदि का इस्तेमाल करें

- बाजार में बिक रहे पहले से कटे हुए फल तो बिलकुल न खाएं

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कैसे लगती है लू

निर्मल अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि लू लगने पर शरीर का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है। गर्मी की वजह से शरीर में पानी और नमक की ज्यादा कमी होने पर लू लगने की आशंका होती है। तेज धूप और गर्मी में नंगे बदन रहने वालों, बिना छाते या सिर को बिना ढके धूप में घूमने वालों, टीन से बने घरों में रहने वालों, आग के सामने काम करने वाले, खेतों में काम करने वालों, खुली धूप में आने-जाने व काम करने वालों, लो इम्युनिटी वालों, शारीरिक रूप से कमजोर, बच्चों, बुजुर्गों और कम पानी पीने वाले लोगों को अक्सर लू लग जाती है। जब शरीर का थर्मोस्टेट सिस्टम यानी शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला सिस्टम शरीर को ठंडा रखने में नाकाम हो जाता है तो शरीर में गर्मी भर जाती है और पानी किसी-न-किसी रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है। इससे शरीर की ठंडक कम हो जाती है और लू लग जाती है।

क्या होता है लू लगने पर

- लू लगने पर शरीर में गर्मी, खुसकी और थकावट महसूस होने लगती है

- मसल्स में खिचाव लगता है, शरीर टूटने लगता है और प्यास बढ़ जाती है

- कई बार बुखार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जैसे कि 105 या 106 डिग्री फॉरेनहाइट

- ब्लड प्रेशर लो हो जाता है और लिवर-किडनी में सोडियम पोटेशियम का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में बेहोशी भी आ सकती है

- इसके अलावा ब्रेन या हार्ट स्ट्रोक की स्थिति भी बन सकती है। ठीक वक्त पर इलाज न कराया जाए तो मौत भी हो सकती है

Posted By: Jagran

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