राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण की तेज होती दूसरी लहर निर्माण कार्यों पर भी भारी पड़ने लगी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माणाधीन सड़कों की तस्वीर तो यही बयां कर रही है। इनके निर्माण में लगाए गए करीब 40 फीसद श्रमिक वापस लौट चुके हैं। इनमें अधिकांश उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के हैं। अपर सचिव एवं राज्य में पीएमजीएसवाई के सीईओ उदयराज सिंह ने इसकी पुष्टि की। साथ ही कहा कि श्रमिकों की वापसी से इन सड़कों के निर्माण की गति धीमी पड़ी है।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत गांवों को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण में कोरोना संकट पिछले साल से निरंतर बाधा डाल रहा है। पिछले साल भी अप्रैल से लेकर अगस्त तक पीएमजीएसवाई की सड़कों के निर्माण कार्यों में लगाए गए श्रमिक अपने राज्यों को लौट गए थे। सितंबर से परिस्थिति कुछ ठीक होने के बाद श्रमिकों की फिर से वापसी हुई और सड़कों के निर्माण ने तेजी पकड़ी। इसके बाद आठ माह के वक्फे में ही पीएमजीएसवाई ने तीन हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें बना डाली। इन कार्यों में स्थानीय निवासियों को भी रोजगार दिया गया।

अब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण परिस्थिति एकदम पिछले साल जैसी हो गई है। अपर सचिव एवं पीएमजीएसवाई के सीईओ उदयराज सिंह के अनुसार राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों को जोडऩे के लिए करीब 850 सड़कों पर काम चल रहा है। अपै्रल से अब तक इन कार्यों में लगे करीब 40 फीसद श्रमिक वापस जा चुके हैं, जिससे निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि वापस लौटे श्रमिकों में ज्यादातर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, बरेली, मुरादाबाद समेत अन्य जिलों के हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिन सड़कों का काम चल रहा है, उनमें 70 फीसद ऐसी हैं जिनमें एक या दो किलोमीटर निर्माण होना शेष है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की वापसी से चुनौती बढ़ गई है, लेकिन आने वाले दिनों में परिस्थिति सामान्य होने पर तेजी से सभी सड़कों का कार्य पूर्ण कराया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

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