संवाद सहयोगी, मसूरी। 49वां जीओ कंबेटाइजेशन कोर्स पूरा करने के बाद शनिवार को 38 युवा डाक्टर बतौर सहायक सेनानी (चिकित्साधिकारी) के रूप में आइटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) की मुख्यधारा में शामिल हुए। मसूरी स्थित आइटीबीपी अकादमी के परेड मैदान में आयोजित परेड की बतौर मुख्य अतिथि आइटीबीपी के महानिदेशक संजय अरोड़ा ने सलामी ली। उन्होंने पास आउट होने वाले अधिकारियों को बल की मुख्यधारा में शामिल होने की बधाई दी। कहा कि बल की तैनाती 19 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित सीमा चौकियों पर की जाती है, जहां पर तापमान शून्य से 45 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है। हिमालय की ऊंचाई वाली सीमाओं की रक्षा के अलावा आइटीबीपी आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन व बचाव में भी अहम भूमिका निभाती है।

अकादमी निदेशक आइजी नीलाभ किशोर ने कहा कि 24 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के दौरान इन अधिकारियों को युद्ध कौशल, हथियार व शारीरिक प्रशिक्षण, फील्ड इंजीनियरिंग, मानचित्र अध्ययन, सैन्य प्रशासन, कानून तथा मानवाधिकार में प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें यह अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए एक कुशल व सक्षम युद्धक चिकित्साधिकारी के रूप में विकसित हुए हैं।

डा. विशाल चौधरी बने बेस्ट ट्रेनी

प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु सहायक सेनानी डा. विशाल चौधरी को बेस्ट इन इंडोर, बेस्ट इन आउटडोर तथा ओवर आल बेस्ट ट्रेनी चुना गया। उन्हें मुख्य अतिथि महानिदेशक संजय अरोड़ा ने पुरस्कृत किया।

केरल के सात और उत्तराखंड से तीन युवा अधिकारी पास आउट

पास आउट होने वाले अधिकारियों में केरल से सर्वाधिक सात, आंध्र प्रदेश के छह, पंजाब के छह, उत्तराखंड के तीन, उत्तर प्रदेश के तीन, हरियाणा के दो, दिल्ली के दो, झारखंड, छत्तीसगढ, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, जम्मू एवं कश्मीर, तमिलनाडु, बिहार व मध्य प्रदेश के एक-एक शामिल हैं। पास आउट हुए 38 अधिकारियों में 14 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।

आइजी पुष्पक ज्योति के बेटे डा. अधिरथ भी हुए पास आउट

पास आउट होने वालों में उत्तराखंड पुलिस के आइजी पुष्पक ज्योति के बेटे डा. अधिरथ भी शामिल रहे। पास आउट होने के बाद डा. अधिरथ ने पिता पुष्पक ज्योति को सैल्यूट किया। डा. अधिरथ ने कहा कि उनका पूरा परिवार वर्दीधारी है और देश सेवा कर रहा है। कहा कि यहां तक पहुंचने में मेरी बहन ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया। आइजी पुष्पक ज्योति ने कहा कि अधिरथ ने आइटीबीपी में शामिल होकर परिवार का गौरव बढ़ाया है। कहा कि मैं पुलिस में सेवाएं दे रहा हूं, दामाद सेना में मेजर है और बेटा आइटीबीपी में अधिकारी बना है। उन्होंने कहा कि देश सर्वोपरि है, देश है तो हम हैं।

देश की रक्षा करने वालों जवानों की सेवा करने का मिलेगा मौका

रायपुर छत्तीसगढ निवासी डा. परमजीत कौर ने कहा कि आइटीबीपी में शामिल होने पर हमें ऐसे जवानों व अधिकारियों की सेवा करने का मौका मिला है, जो देश की रक्षा करते हैं, यह हमारे लिए गौरव की बात है। देहरादून निवासी डा. ऋषभ पाल ने कहा कि माता-पिता के आशीर्वाद व मेहनत से आज जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। कल तक मैं सिर्फ एक डाक्टर था, लेकिन आज डाक्टर के साथ एक अधिकारी भी बन गया हूं।

पांच पीढ़ियां सेना में शामिल होकर करती आ रही हैं देश सेवा

आइटीबीपी में बतौर चिकित्सक शामिल होने वाले सहायक सेनानी पंजाब लुधियाना के डा. सागरदीप ग्रेवाल ने कहा कि आज मेरे लिए गर्व का दिन है। हमारे परिवार के सदस्य पांच पीढिय़ों से सेना में सेवाएं देते आ रहे हैं। आइटीबीपी में शामिल होने पर मेरे पिता ने आज मुझे पांच पीढ़ियों के मेडल भेंट किए। जिन्हें मैने सीने पर लगाया हुआ है। जिसमें प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध के मेडल भी शामिल हैं।

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Edited By: Sunil Negi