देहरादून, जेएनएन। जल जीवन मिशन के तहत उत्तराखंड के हर घर में नल से जल पहुंचाने की राज्य सरकार की महात्वाकांक्षी योजना पर धरातल पर काम तो शुरू हो गया है, लेकिन कार्यदायी संस्था पेयजल निगम में कनिष्ठ अभियंताओं (जेई) की कमी इस योजना को शिथिल कर सकती है। जेई किसी भी तकनीकी निर्माण कार्य की मुख्य कड़ी होते हैं। जमीनी स्तर पर कार्य की प्रगति की निगरानी से लेकर प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए चयनित ठेकेदार से निर्देशों के अनुसार काम कराना, प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होना वाले सामान की गुणवत्ता बरकरार रखना और तय समय पर कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी जेई के कंधों पर ही होती है। यही वजह है कि कनिष्ठ अभियंताओं की कमी से निगम के आला अधिकारी भी परेशान हैं। फिलहाल पेयजल निगम में कनिष्ठ अभियंताओं के आधे से अधिक पद खाली चल रहे हैं।

पेयजल निगम में कनिष्ठ अभियंता के कुल 529 पद हैं। इनमें से फिलहाल 329 पद तकरीबन दो वर्ष से रिक्त चल रहे हैं। जो 200 कनिष्ठ अभियंता वर्तमान में निगम में पदासीन हैं, उनमें से 50 पदोन्नत होने की राह पर हैं। अगर जल्द ही कनिष्ठ अभियंताओं की भर्ती नहीं हुई तो इन 50 अभियंताओं के सहायक अभियंता बनने पर संकट और भी गहरा जाएगा। इन हालात को देखते हुए पेयजल निगम ने शासन को पत्र भेजकर जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरने की गुहार लगाई है।

हालांकि, फरवरी 2020 में अधीनस्थ चयन सेवा आयोग ने कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 121 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति निकाली थी। लेकिन, किन्हीं कारणों से यह मामला हाई कोर्ट चला गया। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई है। इन पदों पर अब तक लिखित परीक्षा भी नहीं हो पाई है। पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक वीसी पुरोहित ने बताया कि 221 कनिष्ठ अभियंताओं की भर्ती के लिए अधीनस्थ चयन सेवा आयोग में प्रक्रिया चल रही है। आउटसोर्स से 150 जेई रखने की अनुमति के लिए शासन को पत्र भी लिखा गया है।

अब सिंचाई विभाग में टोटा 

सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता बृजेश कुमार तिवारी ने जल जीवन मिशन में कनिष्ठ अभियंताओं की ड्यूटी लगाए जाने विभाग में अभियंताओं का टोटा हो गया है। इससे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

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सिंचाई विभाग के कनिष्ठ अभियंता अभियान में लगाए

पेयजल निगम में अभियंताओं की कमी को देखते हुए सरकार ने जल जीवन मिशन में सिंचाई विभाग के कनिष्ठ अभियंताओं से काम लेना शुरू कर दिया है। योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले में सिंचाई विभाग के कनिष्ठ अभियंताओं को लगाया जा रहा है। सरकार ने इसकी जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को दी है। पौड़ी और अल्मोड़ा जिले में सिंचाई विभाग के कनिष्ठ अभियंताओं के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि अन्य जिलों में इस पर काम चल रहा है।

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