देहरादून, [जेएनएन]: एक अप्रैल से देशभर में लागू हुई अंतरराज्यीय ई-वे बिल की व्यवस्था में पहले दिन वैसे तो किसी तरह की तकनीकी खामी की जानकारी नहीं मिली। लेकिन, ई-वे बिल जेनरेट होने की संख्या काफी कम पाई गई। इसके अलावा राज्य के डैश बोर्ड पर दोपहर दो बजे तक जेनरेट किए गए ई-वे बिल का ही ब्योरा पता चल पाया। उस समय तक राज्य में 2754 ई-वे बिल जेनरेट कर लिए गए थे। 

आयुक्त राज्य कर कार्यालय के उपायुक्त एसएस तिरुवा के अनुसार ई-वे बिल के लिए हर राज्य का अलग डैश बोर्ड बनाया गया है। उत्तराखंड की बात करें तो अभी डैश बोर्ड ने सुचारू रूप से काम करना शुरू नहीं किया है और सोमवार तक इसके ढंग से काम करने की उम्मीद है। इससे ई-वे बिल के जेनरेशन में तो कोई दिक्कत नहीं आ रही, लेकिन सूचना अपडेट नहीं हो पा रही है। 

रविवार को दोपहर दो बजे के बाद पता नहीं चल पाया कि कितने ई-वे बिल जेनरेट हुए हैं। दोपहर दो बजे तक जेनरेट किए गए 2754 ई-वे बिल की तुलना अन्य दिनों से करें तो यह संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है। 31 मार्च को राज्य में करीब 12 हजार ई-वे बिल जेनरेट किए गए थे। 

इसी तरह 27 मार्च को यह आंकड़ा 22 हजार, 22 मार्च को 24 हजार और कई दफा 25 हजार से अधिक भी ई-वे बिल जेनरेट किए गए हैं। हालांंकि भारी वाहनों के शाम के बाद ही अधिकतम आवागमन को देखते हुए माना जा सकता है कि एक अप्रैल को यह संख्या देर रात तक काफी ऊपर चली गई हो। फिर भी वास्तविक स्थिति का पता सोमवार तक ही चल पाएगा। 

राज्य के भीतर ई-वे बिल लागू न होने का भी असर

अभी तक वैकल्पिक व्यवस्था में राज्य के भीतर भी 50 हजार रुपये से अधिक के माल के परिवहन पर ई-वे बिल जेनरेट किया जा रहा था। जबकि, इस व्यवस्था को फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस कारण भी ई-वे बिल की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम हो जाएगी। 

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Posted By: Raksha Panthari

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