देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। या यूं कहें कि दिन-प्रतिदिन यह वायरस घातक होता जा रहा है। स्थिति यह कि करीब एक माह के भीतर प्रदेश में स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीजों का आकड़ा सौ पार कर गया है। 27 और मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके बाद मरीजों की अब तक की संख्या बढ़कर 125 हो गई है। 

जिन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, उनमें 16 मरीज श्री महंत इंदिरेश अस्पताल, दो दून अस्पताल, चार मरीज मैक्स अस्पताल, तीन कैलाश अस्पताल और एक-एक मरीज हिमालयन अस्पताल जौलीग्राट व गढ़ी कैंट स्थित मिलिट्री अस्पताल में भर्ती हैं। 

बता दें, स्वाइन फ्लू से अब तक 19 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें अकेले 16 मरीजों की मौत पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में हुई है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिन 125 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है उनमें सर्वाधिक 85 मरीज श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में, 21 मरीज मैक्स अस्पताल, सात मरीज दून अस्पताल, छह मरीज सिनर्जी अस्पताल, चार मरीज कैलाश अस्पताल और एक-एक मरीज हिमालयन अस्पताल जौलीग्राट व मिलिट्री अस्पताल में भर्ती हुए हैं। 

इनमें से कुछ मरीजो की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ उपचार के बाद घर पर आराम कर रहे हैं। 30 से अधिक मरीज अब भी शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। कुल मिलाकर स्वाइन फ्लू की बीमारी फैलाने वाले वायरस एच1एन1 का कहर बढ़ता ही जा रहा है। वह भी तब जबकि स्वास्थ्य महकमा इसके नियंत्रण व रोकथाम के दावे कर रहा है। 

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्वाइन फ्लू पर नियंत्रण पाने के लिए हर स्तर से तैयारिया की गई हैं। सभी निजी व सरकारी अस्पतालों को पूर्व में ही निर्देश दिए गए हैं कि स्वाइन फ्लू का कोई भी मरीज आने पर तुरंत इसकी जानकारी सीएमओ कार्यालय को भेजी जाए। 

मरीजों के उपचार के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाने व उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं। आम जन को जागरूक भी किया जा रहा है। 

मरीजों को बाजार में आसानी से मिलेगी दवा 

स्वाइन फ्लू के बढ़ते कहर को देखते हुए प्रदेश का औषधि नियंत्रक विभाग भी हरकत में दिख रहा है। स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीजों को बाजार में आसानी से दवा मिले इसके लिए औषधि नियंत्रक ताजबर सिंह जग्गी ने सभी औषधि निर्माता इकाईयों व मेडिकल स्टोर को निर्देश जारी किए हैं। 

उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों के उपचार के लिए ओसेल्टामिविर दवा खासी कारगर है। बताया कि इस दवा को केंद्र सरकार द्वारा शेड्यूल एक्स की सूची से हटाते हुए वर्तमान में एच1 में शामिल किया गया है। ताकि यह दवा बाजार में आसानी से मिल जाए। 

उन्होंने सभी मेडिकल स्टोर को निर्देशित किया है कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को समय पर उपचार के लिए सभी अपने-अपने स्तर पर दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करें। औषधि निरीक्षकों को भी इसका अनुश्रवण करने के निर्देश उन्होंने दिए हैं।

क्या है स्वाइन फ्लू 

स्वाइन फ्लू, इनफ्लुएंजा (फ्लू वायरस) के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इस वायरस को ही एच1 एन1 कहा जाता है। इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था, क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से यह मिलता-जुलता था। 

स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैलता है। कई बार यह मरीज के आसपास रहने वाले लोगों और तीमारदारों को भी चपेट में ले लेता है। किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखना चाहिए, स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए। 

स्वाइन फ्लू के लक्षण 

नाक का लगातार बहना, छींक आना कफ, कोल्ड और लगातार खासी मासपेशियों में दर्द या अकडऩ सिर में भयानक दर्द नींद न आना, ज्यादा थकान दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढऩा गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना।  

ऐसे करें बचाव 

स्वाइन फ्लू से बचाव इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाय है। इसका उपचार भी मौजूद है। लक्षणों वाले मरीज को आराम, खूब पानी पीना चाहिए। शुरुआत में पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढऩे पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर, अब तक 19 मरीजों की मौत

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर जारी, एक और मरीज की मौत

यह भी पढ़ें: नहीं थम रहा स्वाइन फ्लू का कहर, आठ और मरीजों में पुष्टि

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप