देहरादून, जेएनएन। 24वें पंद्रह दिवसीय विरासत कार्यक्रम का शुक्रवार को कौलागढ़ रोड स्थित बीआर आंबेडकर स्टेडियम में शुभारंभ हुआ। शाम सात बजे से कार्यक्रम शुरू होते ही स्टेडियम में सैकड़ों की संख्या में दर्शक उमड़ पड़े। कार्यक्रम की शुरुआत जौनसारी लोक नृत्य छोलिया की प्रस्तुति के साथ हुई। छोलिया की प्रस्तुति देख दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। 

कार्यक्रम का उद्घाटन पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट ने किया। जैसे ही वह मंच पर पहुंचे पूरा स्टेडियम तालियों की गड़-गड़ाहट से गूंज उठा। मंच पर पुत्र सलील के साथ खड़े विश्व मोहन भट्ट ने विरासत के 24 साल पूरे होने पर गणोश वंदना सुनाई। उन्होंने कहा कि विरासत एक ऐसा कार्यक्र म है जो युवाओं को भारतीय संस्कृति के साथ जोड़े रखता है। पिता पुत्र द्वारा विश्व रंजनी राग शुरू करते ही लोग मंत्रमुग्ध हो उठे। श्रोता हाथ और पैर को हिलाकर स्वरों को महसूस करने लगे। 

इस दौरान तबला वादक हिमांशु महंत रहे। पिता-पुत्र की यह जुगलबंदी लाइव और बिना रिहर्सल के रही। पंडित विश्व मोहन भट्ट ने बताया उनके लिए हर प्रोग्राम चैलेंज की तरह होता है। जिसे अपना पहला कार्यक्रम समझकर प्रस्तुति देते हैं। शास्त्रीय संगीत की खासियत यह है कि यह निर्धारित नहीं होता। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पसंदीदा गीत हमको मन की शक्ति देना और वंदे मातरम् पर प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम में 170 के करीब खाद्य पदार्थों, खरीदारी व अन्य सामग्री के स्टॉल लगाए गए। जहां देर रात तक लोगों की आवाजाही लगी रही। इस मौके पर डायरेक्टर एके सिंह, लोकेश ओहरी उपस्थित रहे।

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शाहिद नियाजी और सामी नियाजी बांधेंगे समा:कार्यक्रम के दूसरे दिन उत्तराखंड के कलाकार झोड़ा-चांचरी नृत्य की प्रस्तुति देंगे। वहीं शाहिद नियाजी और सामी नियाजी कव्वाली की प्रस्तुति से कार्यक्रम की शोभा बढाएंगे। इस दौरान गरिमा आर्य चतुरलाल कथक प्रस्तुति देंगे।

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Posted By: Sunil Negi

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