राज्य ब्यूरो, देहरादून। Nagar Van Yojna देश के सभी शहरी क्षेत्रों में नागरिकों को सुकून की छांव मुहैया कराने के मद्देनजर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नगर वन योजना के मानकों में बदलाव किया गया है। इसके तहत दो श्रेणियां बनाई गई हैं। नगर वन के लिए भूमि का मानक 10 से 50 हेक्टेयर और नगर वाटिका के लिए एक से 10 हेक्टेयर तक किया गया है। इसे देखते हुए अब उत्तराखंड में योजना को लेकर गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं। सभी नगर निकायों (नगर निगम, नगर पालिका,नगर पंचायत) में नगर वन अथवा वाटिका के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, जो 31 अक्टूबर तक अनुमोदन के लिए केंद्र को भेजे जाएंगे।

आज की भागदौड़ भरी जीवन शैली में नागरिकों को कुछ क्षण प्रकृति के सानिध्य में बिताने को मिल जाएं तो सोने में सुहागा। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पूर्व में नगर वन योजना लांच की। अब शहरी क्षेत्रों की स्थिति और वहां भूमि की उपलब्धता के मद्देनजर इसके मानक भी बदले गए हैं। भूमि संबंधी मानकों में बदलाव से उत्तराखंड को भी लाभ मिला है और अब यहां के सभी 97 नगर निकायों में नगर वन या नगर वाटिकाएं स्थापित हो सकेंगी। पूर्व में केवल आठ नगर निगमों से ही नगर वन के प्रस्ताव मिल पाए थे।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि नगर वन अथवा नगर वाटिका से संबंधित प्रस्ताव अनुमोदन के लिए हर हाल में 31 अक्टूबर तक मंत्रालय को भेज दिए जाएं। इसी कड़ी में वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी ने अपर प्रमुख वन संरक्षक परियोजनाएं को इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे सभी डीएफओ से 31 अक्टूबर से पहले प्रस्ताव मंगवाकर इन्हें केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय को भेजना सुनिश्चित करें।

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नगर वन योजना

-नगर क्षेत्र में अधिकतम पांच किमी की परिधि में स्थापित होंगे नगर वन अथवा वाटिका

-छोटे नगर निकायों में एक से 10 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित हो सकेंगी नगर वाटिका

-निकाय क्षेत्रों में नगर वन के लिए 10 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र होना आवश्यक

-समुदाय की भागीदारी से विकसित किए जाएंगे नगर वन अथवा वाटिकाएं

-केंद्र सरकार चार लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुहैया कराएगी धनराशि

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Edited By: Raksha Panthri