जागरण संवाददाता, देहरादून। Dehradun St Thomas Church दून में ऐतिहासिक सेंट थॉमस चर्च हर किसी को अपनी ओर आर्कषित करता है। इतने पुराने चर्च के बारे में हर कोई जानने को  इच्छुक रहता है। चलिए हम आपको बताते हैं इस चर्च की कुछ खासियत।

तकरीबन 180 साल पुराने देहरादून के सेंट थॉमस चर्च के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। देहरादून के व्यस्ततम राजपुर रोड पर दिलाराम बाजार में स्थित यह चर्च लंबे अर्से तक बंद पड़ा रहा। वर्ष 2012 में इसे दोबारा खोला गया। सेंट थॉमस चर्च की सबसे बड़ी खासियत इसका सेना से जुड़ा इतिहास है। वर्ष 1840 में बने इस चर्च की इमारत और लंबे-चौड़े गार्डन की भव्यता देखते ही बनती है। पॉप म्यूजिक के दीवानों की तो यह खास जगह है। यह वही चर्च है, जहां ब्रिटिश संगीतकार, कलाकार एवं अभिनेता सर क्लिफ रिचर्ड का बपतिस्मा हुआ था। 

सर क्लिफ रिचर्ड का जन्म लखनऊ में हुआ था और बाद में उनका परिवार देहरादून शिफ्ट हो गया। यह चर्च सीएनआइ (चर्च ऑफ नार्थ इंडिया) के अधीन है। इस चर्च को सेना के लिए बनाया गया था और यहां सेना के जवान और सर्वे ऑफ इंडिया से जुड़े लोग प्रार्थना करने आते थे। इसीलिए यह चर्च आर्मी (गैरिसन) चर्च के रूप में जाना जाता था। इस चर्च को देखने और इसका इतिहास जाने के लिए राज्य व राज्य से बाहर के लोग यहां आते हैं।

मॉरीसन मेमोरियल चर्च

सीएनआइ द्वारा संचालित राजपुर रोड स्थित मॉरीसन मेमोरियल चर्च 25 अगस्त 1884 को बनकर तैयार हुआ था। अंग्रेजों का बनाया यह दून का सबसे बड़ा एवं खूबसूरत चर्च है। यह उत्तर भारत के सबसे पुराने चर्चों में से एक है। इस चर्च का मूल नाम देहरा प्रेस्बायटेरियन था, जिसे वर्ष 1890 में एपी मिशन हिंदुस्तानी चर्च कर दिया गया। इसके बाद यहां के प्रमुख पास्टर रेवरेन जॉन मॉरीसन और उनकी पत्नी के नाम पर इस चर्च को मॉरीसन नाम दिया गया। पास्टर पीजे सिंह बताते हैं कि इस चर्च में श्रद्धालुओं  की आस्था उन्हें यहां खींच ले आती है।

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