देहरादून, सुमन सेमवाल/सोबन गुसाईं। Jagran Safe Traffic Week तेज रफ्तार पलभर का रोमांच तो दे सकती है, मगर जरा सी चूक जिंदगी की रफ्तार पर हमेशा के लिए ब्रेक लगा सकती है। रफ्तार का जुनून वाहन चालक पर सवार होता है, मगर उसकी कीमत पूरे परिवार को चुकानी पड़ जाती है। सड़क दुर्घटना की त्रसदी तब और बड़ी लगती है, जब कोई मासूम व्यक्ति दूसरे की गलती का शिकार हो जाता है।

सड़क पर एक दूसरे से बेवजह आगे निकलने की होड़ और गंतव्य तक महज कुछ मिनट पहले पहुंचने की हड़बड़ी में अक्सर तमाम लोग सड़क सुरक्षा के कायदे भूल जाते हैं। वह भूल जाते हैं कि सड़क हादसों में कई बार गलती सुधारने का भी मौका नहीं मिल पाता। जिंदगी हौले-हौले यूं ही आगे बढ़ती रहे इसके लिए रफ्तार पर ब्रेक लगाना बेहद जरूरी है, क्योंकि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले तीन साल में 48 फीसद तक सड़क हादसों की वजह सिर्फ तेज रफ्तार रही है। कुल 836 सड़क हादसों में 392 व्यक्ति अकाल मौत का शिकार हो चुके हैं।

दून में सड़क हादसों की वजह की बात करें तो तेज रफ्तार (ओवरस्पीडिंग) के बाद सबसे अधिक दुर्घटनाएं गलत तरीके से वाहनों को ओवरटेक करने और गलत साइड से वाहन चलाने के कारण हो रही हैं। तीन साल में इस प्रवृत्ति के चलते 199 सड़क दुर्घटनाएं हुई और 92 व्यक्तियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति भी असामान्य है और वाहन चलाने के प्रति चालकों की लापरवाही को दर्शाती है। सड़क पर सफर के दौरान न चाहते हुए भी हादसे हो जाते हैं, इस तरह के हादसे बताते हैं कि जरा सी समझदारी दिखाकर इन्हें रोका जा सकता है। बशर्ते वाहन चालक यातायात के नियमों का पालन करें।

नशे की डोज भी जान पर भारी

शराब या मादक पदार्थ का सेवन कर वाहन चलाना भी यह बताता है कि दून जैसे जागरूक नागरिकों के शहर में अभी भी बेपरवाही हावी है। पिछले तीन साल में इसके चलते 22 सड़क हादसे हुए और 13 व्यक्तियों की जान चली गई।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड: हर साल सैकड़ों घरों के चिराग बुझा रहे हादसे, बीते साल इन जिलों में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021