देहरादून, जेएनएन। Janmashtami दून में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी मंगलवार 11 अगस्त सुबह नौ बजकर सात मिनट पर शुरू होकर बुधवार 12 अगस्त को दिन के 11:17 बजे तक रहेगी। भक्त 11 और 12 अगस्त, दोनों ही दिन अपनी मान्यता के अनुसार व्रत रख सकते हैं। कोरोना संक्रमण के लिहाज से इस वर्ष मंदिरों में बड़े आयोजन नहीं होंगे।

उत्तराखंड विद्वत सभा के अध्यक्ष डॉ. संदीप रतूड़ी ने बताया कि पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। अष्टमी का व्रत स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय अलग-अलग दिन रखते हैं। उत्तराखंड में स्मार्त, गणपत्य, शाक्त और सौर संप्रदाय के अनुयायियों की बहुलता है। ऐसे में ज्यादातर भक्त 11 अगस्त को ही व्रत रख सकते हैं। वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लोग 12 अगस्त को व्रत रख सकते हैं। दोनों ही दिनों के व्रत फलीभूत होते हैं।

ऐसे करें पूजा 

शास्त्री शिव प्रसाद ग्वाड़ी ने बताया कि अष्टमी पर भगवान कृष्ण के लड्डू गोपाल रूप की पूजा की जाती है। इसके लिए सबसे पहले खीरे में लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान कृष्ण के बालस्वरूप को पात्र में रखें। लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान करवाएं। नए वस्त्र पहनाकर रोली और अक्षत से तिलक करें। माखन मिश्री का भोग लगाएं। श्रीकृष्ण को तुलसी का पत्ता अर्पित करें। भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल भी अर्पित करें। हाथ जोड़कर अपने आराध्य देव का ध्यान लगाएं।

रुड़की में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां शुरू 

रुड़की में गंग नहर किनारे स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। शुक्रवार को मंदिर में स्थापित सभी देवी-देवताओं का स्नान किया गया। सभी देवी-देवताओं को नए वस्त्र पहनाने के बाद उनका श्रृंगार किया गया। श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के पंडित रामगोपाल पराशर ने बताया कि मंदिर में  11 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। बताया कि मंदिर में शुक्रवार से जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में लाइटिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस वर्ष कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण के खतरे को देखते हुए सारी व्यवस्था की जाएगी। बताया कि मंदिर के बाहर झूला लगाया जाएगा। जहां से भक्तगण भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे।

यह भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2020 Celebration: रक्षाबंधन पर बहनों के प्यार से सजी भाइयों की कलाई, एक महीने तक न खोलें राखी

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस