देहरादून, जेएनएन। श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य और अखंड परमधाम आश्रम के परमाध्यक्ष युगपुरुष स्वामी परमानंद सरस्वती चारों धाम की मिट्टी, गंगा समेत अन्य नदियों का जल ओर कैलास से लाए गए पत्थर लेकर रविवार को अयोध्या के लिए रवाना हुए। इस मौके पर अखंड परमधाम की ओर से उन्हें श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख का चेक भी भेंट भी किया गया। स्वामी परमानंद ने कहा कि जरूरत पड़ने पर श्रीराम मंदिर के लिए वह अपना आश्रम भी बेच देंगे।

महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद के अयोध्या रवाना होने से पहले अखंड परमधाम आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान उन्होंने कहा है कि अगले तीन वर्षों में श्रीराम मंदिर के तैयार होने की संभावना है। अगर इस अवधि में राजनीतिक कारणों से मंदिर निर्माण में ढिलाई बरती गई तो उसके खिलाफ आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि श्रीराम जन्मभूमि के बाद अब संतों को काशी विश्वनाथ और मथुरा भी चाहिए।

स्वामी परमानंद ने बताया कि सोमवार को वह अयोध्या में आयोजित गणोश पूजा में भाग लेंगे और पांच अगस्त को मंदिर शिलान्यास के बाद हरिद्वार वापसी करेंगे। इस मौके पर अखंड परमधाम आश्रम के संरक्षक महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर साध्वी दिव्य चेतनानंद गिरि, विहिप के जिलाध्यक्ष नितिन गौतम आदि उपस्थित थे। इससे पूर्व विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच और गंगासभा के प्रतिनिधियों ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया।  जागरण

पलटन बाजार की दुकानों में रात को डालते थे पर्चे

वह एक अद्भुत कालखंड था। श्री राम के नाम ने हमें दीवाना बना दिया था। आंदोलन से जुड़कर हर कोई अयोध्या को राम वापस दिलाने के प्रयास में जुटे थे। करीब 40 वर्ष की आयु में मैं जब आंदोलन से जुड़ा तो हमारी नौजवानों की टोली आंदोलन के प्रचार की जिम्मेदारी संभालती थी। तब हम रात के समय शहर में दीवारों पर पर्चे चिपकाया करते थे। सुबह होने से पहले ही पलटन बाजार की दुकानों में शटर के नीचे से पर्चा डाला करते थे। पुलिस का भी खौफ था, लेकिन पुलिस को चकमा देने में हर बार हम कामयाब हो जाते थे। 

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विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रवि देव आनंद का कहना है कि मैं राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रभारी रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल का निजी सहायक था। इसके अलावा मैं डॉ. नित्यानंद के साथ भी सक्रिय रहा। डॉ. नित्यानंद तब डीबीएस कॉलेज के डीन होने के साथ ही आंदोलन में भी अहम भूमिका निभा रहे थे। कई बार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया, लेकिन, हम उन्हें अक्सर किसी न किसी के घर पर छुपा देते थे। जब मैं संघ कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय था, तब एक बार पुलिस ने हमें डीबीएस कॉलेज में घेर लिया था। अब हमारा आंदोलन सफल होने जा रहा है।

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