देहरादून, जेएनएन। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से जुड़ी एक बड़ी खामी सामने आई है। राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद से ग्रसित लोगों के निश्शुल्क ऑपरेशन की सुविधा है। लाभार्थी धड़ल्ले से निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करा रहे हैं। हद देखिए कि योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में महज 189 सर्जरी की गई, जबकि निजी अस्पतालों का आंकड़ा 25052 तक पहुंच गया है।

इसका एक करोड़ 87 लाख से अधिक का क्लेम सरकार की तरफ से दिया गया है। इसके बाद अब निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन बंद कर दिए गए हैं। ये ऑपरेशन अब सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही किए जाएंगे। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युगल किशोर पंत ने इस बावत निर्देश जारी कर दिए हैं। 

बता दें, अटल आयुष्मान योजना के तहत सरकारी अस्पतालों के अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी मोतियाबिंद का ऑपरेशन किए जा रहे हैं। यह कोई जटिल ऑपरेशन नहीं होता है। तमाम सरकारी अस्पतालों में इस तरह के ऑपरेशन करने की सुविधा उपलब्ध है। वहीं तमाम शिविर के माध्यम से भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन हर अंतराल बाद होते हैं। 

राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत निश्शुल्क ऑपरेशन की सुविधा है, पर आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। निजी अस्पतालों में सरकारी की तुलना में कई अधिक ऑपरेशन हुए हैं। जिससे सरकारी खजाने पर भी बड़ी चपत लगी है। ऐसे में निर्णय लिया गया है कि योजना के तहत अब सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही ऑपरेशन किए जाएंगे। 

इसमें किसी भी तरह की आपात स्थिति उत्पन्न नहीं होती है। मरीज निजी अस्पतालों के लिए रेफर नहीं किए जाएंगे। बताया गया कि निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए जो पैकेज निर्धारित किए गए थे, उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा ब्लॉक किया जा रहा है। बता दें, मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों को पांच हजार से लेकर साढ़े दस हजार का पैकेज आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित किया गया था।

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Posted By: Bhanu

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