देहरादून, [जेएनएन]: इंजीनियरिंग क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए इस बार दाखिले के अधिक अवसर होंगे। ज्वाइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (जोसा) की वेबसाइट पर जारी सीट मैट्रिक्स के अनुसार आइआइटी, एनआइटी, ट्रिपल आइटी व जीएफटीआइ में इस साल सीट बढ़ गई हैं। कुल 37952 सीटों के साथ-साथ 1473 अतिरिक्त सीटें छात्राओं को आवंटित की जाएंगी। 

आइआइटी, एनआइटी, ट्रिपलआइटी व जीएफटीआइ में प्रवेश के लिए ज्वाइंट काउंसलिंग सात राउंड में होगी। एनआइटी, ट्रिपलआइटी की रिक्त रही सीटों के लिए दो स्पेशल राउंड काउंसलिंग भी करवाई जाएगी। विद्यार्थियों को अपने कॉलेजों को प्राथमिकता के घटते हुए क्रम में भरने का एक ही अवसर मिलेगा। लॉक करने के बाद बदलाव संभव नहीं। काउंसलिंग प्रक्रिया 15 जून से शुरू होने जा रही है।

फ्रीज, फ्लॉट और स्लाइड का विकल्प बलूनी क्लासेज के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी के अनुसार अगर किसी अभ्यर्थी ने सीट मिलने के बाद उसे रिजेक्ट कर दिया तो वह काउंसिलिंग की पूरी प्रक्रिया से बाहर हो जाएगा। काउंसिलिंग में बने रहने के लिए अभ्यर्थी को फ्रीज, फ्लॉट और स्लाइड का विकल्प दिया गया है। फ्रीज के तहत अभ्यर्थी किसी संस्थान में कोई सीट अलॉट होने के बाद उसे फ्रीज कर सकता है। इसके बाद अन्य चरणों की काउंसलिंग में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। 

फ्लॉट के तहत अभ्यर्थी को सीट स्वीकार करने के बाद यह सुविधा मिलेगी कि वह अच्छी सीट मिलने पर इस सीट को छोड़ दें। अगर अच्छी सीट न मिली तो इस सीट पर ही दाखिला लेगा। इस विकल्प को चुनने वालों को आगे के चरणों की इंजीनियरिंग काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिलेगा। स्लाइड के तहत अगर कोई अभ्यर्थी किसी संस्थान में सीट पा लेता है तो वह उसे स्लाइड कर सकता है।

यानी उसी संस्थान में इस सीट से बेहतर सीट मिलने पर स्लाइड का लाभ मिलेगा। अगर बेहतर सीट न मिली तो उसी सीट पर कायम रहना होगा। इस विकल्प को चुनने वाले अभ्यर्थियों को भी आगामी राउंड की काउंसिलिंग में शामिल होने का मौका मिलेगा। 

जेंडर न्यूट्रल एवं फीमेल पूल अविरल क्लासेज के निदेशक डीके मिश्रा ने बताया कि काउंसिलिंग में भाग लेने वाले आइआइटी, एनआइटी व अन्य संस्थानों की सीटों को जेंडर न्यूट्रल एवं फीमेल पूल में विभाजित किया गया है। यह प्रत्येक कॉलेज की प्रत्येक ब्राच में लागू किया गया है। छात्राओं को सीट आवंटन के लिए पहले फीमेल पूल में स्पर्धा करनी होगी। उसमें सीट नहीं मिलने पर उन्हें जेंडर न्यूट्रल पूल में रैंक की वरीयता के आधार पर सीट आवंटित की जा सकेगी। 

ड्यूल रिपोर्टिंग का रखें ध्यान 

वीआर क्लासेज के प्रबंध निदेशक वैभव राय के अनुसार ड्यूल रिपोर्टिग का ध्यान छात्रों को रखना होगा। उदाहरण के तौर पर च्वॉइस फिलिंग के आधार पर किसी छात्र को पहले आइआइटी में सीट मिल रही है तो उसे आइआइटी के रिपोर्टिग सेंटर पर रिपोर्ट करना होगा। इसके बाद उसे एनआइटी में पसंदीदा ब्रांच पर सीट अलॉट होती है और वह एनआइटी की सीट लेना चाहता है तो उसे दोबारा एनआइटी के रिपोर्टिग सेंटर पर रिपोर्ट करना होगा। यह प्रक्रिया ड्यूल रिपोर्टिग में आती है। 

गत वर्ष कई छात्रों को जोसा से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। जोसा की ओर से वेबसाइट पर बिजनेस रूल्स जारी किए गए हैं, छात्र उन्हें ठीक तरह से पढ़ लें। ताकि किसी तरह की गलती से बचा जा सके। एक बार में 125 से ज्यादा च्वॉइस देश के 23 आइआइटी में दाखिले के लिए छात्रों को एक बार ही च्वॉइस फिलिंग का मौका मिलेगा। एक बार में ही 125 से ज्यादा च्वॉइस फिलिंग के विकल्प उनके पास रहेंगे। एनआइटी, ट्रिपल आइटी और जीएफटीआइ में वह एक बार में 590 से ज्यादा च्वॉइस फिल कर सकेंगे। 

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