राज्य ब्यूरो, देहरादून:

केंद्र सरकार अब अनुसूचित क्षेत्रों में खनन गतिविधियों से प्रभावित गांवों के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना में अब तक किए गए कार्यो की समीक्षा करेगी। केंद्र की इस योजना को हाल ही में प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड जिला खनिज फाउंडेशन न्यास नियमावली का हिस्सा बनाया है।

सरकार ने नवंबर में जिला खनिज फाउंडेशन न्यास नियमावली को मंजूरी प्रदान की थी। इसमें यह प्रावधान किया गया था कि राज्य के सभी उपखनिज पट्टाधारकों को रॉयल्टी का 25 फीसद अलग से भी अंशदान जमा करना होगा। फाउंडेशन इस राशि को खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करेगा। इसका मकसद खनन वाले जिलों में लोगों के पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक आर्थिक व्यवस्था पर खनन के दौरान अथवा उसके बाद पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने और इसमें कमी लाना है। इसके साथ ही खनन क्षेत्रों में प्रभावित लोगों के लिए दीर्घकालिक जीविका सुनिश्चित करना भी है।

इसी नियमावली में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना को भी समाहित किया गया है। इस योजना में विशेषकर वन क्षेत्र में होने वाली खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और स्थानों के सामाजिक तथा आर्थिक उन्नयन के लिए अलग से निधि का आवंटन किया गया है। एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2015 के तहत राज्य सरकारों को जनपद खनिज फाउंडेशन के गठन का अधिकार मिलता है। इस योजना के तीन लक्ष्य है। इसमें खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक और कल्याणकारी परियोजनाओं, कार्यक्रमों का क्रियान्वयन शामिल है। इसमें पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं खनन मिलों में लोगों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समाप्त करना और खनन क्षेत्र के प्रभावित लोगों के लिए दीर्घकालीन टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करना है।

चूंकि प्रदेश में भी अब जिला फाउंडेशन न्यास नियमावली बन चुकी है इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अब इसकी समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। इसमें प्रदेश की ओर से इस योजना के तहत किए गए कार्यो का लेखा जोखा रखा जाएगा।

Posted By: Jagran

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