जागरण संवाददाता, ऋषिकेश : प्रतिभा पैसे की मोहताज नहीं होती। जरूरत उसे पहचानने और तराशने की है। कोरियर कंपनी में कार्यरत अनिल धीमान गायक बनना चाहते थे, लेकिन कई ऑडिशन में बाहर होने के बाद उन्होंने अपने बेटे का गायन के लिए प्रेरित किया। पापा के सपोर्ट की बदौलत 13 वर्षीय अभिनव धीमान ने एंड टीवी के द वाइस इंडिया किड्स में टॉप-20 में जगह बना ली है। इस कार्यक्रम में अभिनव गायक शान की टीम का सदस्य है।

शिवाजीनगर बापूग्राम निवासी अनिल धीमान कोरियर कंपनी में काम करते हैं। उन्हें गाने का शौक था और आगे बढ़ने के लिए वह विभिन्न चैनलों के ऑडिशन में ं भाग लेते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। तब उन्होंने ठाना कि मैं नहीं तो मेरा बेटा अभिनव मेरी इच्छा को पूरा करेगा। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले अनिल धीमान के पुत्र को निर्मल आश्रम द्वारा संचालित निर्मल ज्ञानदान अकादमी खैरीकलां ने अपनाया और उसका पूरा पढ़ाई का जिम्मा लिया। अनिल धीमान बताते हैं कि वर्ष 2014 में अभिनव ने स्कूल के मंच पर जब गीत गाया तो शिक्षक और अभिभावक काफी प्रभावित हुए। शिक्षकों की सलाह पर मैंने बेटे को गायन के लिए प्रेरित किया। ऑडिशन देने के बाद अभिनव को सारेगामापा लिटिल चैंप्स 2017 में शामिल होने का मौका मिला और देश भर से आए बाल कलाकारों के बीच टॉप-60 में शामिल होने के बाद उसे रजत पदक मिला। यहां से अभिनव के हौसले को उड़ान मिली। देहरादून में छह अगस्त को ऑडिशन में सफल होने के बाद एंड टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम द वॉयस इंडिया किड्स जिसमें गायक शान, हिमेश रेशमिया निर्णायक की भूमिका में हैं। इस कार्यक्रम में अभिनव को शान की टीम में जगह मिली। इस कार्यक्रम में अभिनव ने पूरे देश से आए प्रतिभागियों में से टॉप-20 में जगह बनाई है। अभिनव के पिता अनिल बताते हैं कि बेटे को ऊंचाईयों पर देखने के लिए दिल्ली से मुंबई तक के सफर में चार माह की तनख्वाह लगा दी। बस हसरत यही है कि बेटा और आगे बढ़े। बाल गायक अभिनव धीमान का कहना है कि वह दो घंटे संगीत का अभ्यास करता है। वह स्वयं पा‌र्श्वगायक बनना चाहता है। इस होनहार के आठवीं में 90 फीसद अंक आए हैं।

Posted By: Jagran

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