जागरण संवाददाता, देहरादून:

रायपुर के रांझावाला में अगस्त 2015 में प्रकाश में आए नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव झाड़ियों में छिपाने के मामले में विशेष न्यायाधीश पोक्सो रमा पांडेय की अदालत ने दोषी तांत्रिक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। तांत्रिक मूलरूप से बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है। वारदात से चंद महीने पहले वह रंगाई-पुताई का काम करने के दौरान पीड़िता के परिवार के संपर्क में आया था।

सरकारी अधिवक्ता बीएस नेगी ने अदालत को बताया कि पीड़ित परिवार अपनी पत्‍‌नी और कक्षा पांच में पढ़ने वाली नाबालिग बेटी के साथ रायपुर क्षेत्र में रहता था। 18 अप्रैल 2015 में इलाके में रहने वाला अबू हसन पुत्र इसहाक निवासी फरसाडांडी थाना प्लासी जिला अररिया (बिहार) पीड़िता के पिता के संपर्क में आया। अबू हसन ने कहा कि उसके पास कोई काम धंधा नहीं है। इस पर पेंटर का काम करने वाले पीड़िता के पिता ने अबू को अपने साथ हेल्पर रख लिया। इसके बाद अबू का पीड़िता के घर आना-जाना हो गया। इस दौरान अबू ने बताया कि वह झाड़-फूंक का भी काम करता है और अक्सर बीमार रहने वाली पीड़िता की मां का इलाज भी किया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में अबू ने पीड़िता के साथ छेड़खानी की तो उसके पिता की निगाह पड़ गई। उसने अपनी पत्‍‌नी को आगाह किया कि अबू की हरकत पर नजर रखे और बेटी को उसके पास न जाने दे। मगर चार अगस्त 2015 को अबू नाबालिग को पिता से मिलाने के बहाने घर से बाहर लेकर चला गया। बेटी को लेकर जाते उसकी मां ने देख लिया था। करीब एक घंटे बाद अबू लौटा तो वह अकेला था। मां ने पूछा तो उसने बताया कि उसकी बेटी अपनी सहेली के घर चली गई है। मगर देर शाम तक बच्ची नहीं लौटी तो परिवार ने रायपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। तब अबू हसन भी परिजनों के साथ रायपुर थाने पहुंचा था। पुलिस ने जब परिवार से बच्ची की फोटो देने को कहा तो अबू हसन ने तुरंत अपनी मोबाइल में बच्ची की फोटो दिखाने लगा। पुलिस को तभी शक हुआ कि परिवार में से केवल बच्ची की फोटो उसके पास क्यों है। अबू हसन को पुलिस ने दूसरे दिन थाने आने को कहा, लेकिन वह गायब हो गया। देर शाम पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की तो उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म की बात स्वीकार की और यह भी बताया कि वारदात के समय बच्ची ने यह बात घर वालों को बताने की बात कही थी, जिसके बाद उसने बच्ची के सिर पर पत्थर मारकर हत्या कर दी। पीएम रिपोर्ट में बालिका से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर 10 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव में एक भी गवाह अदालत में पेश नहीं हुआ।

अलग-अलग चलेंगी सजाएं

अदालत ने हत्या के लिए आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना, दुष्कर्म में 10 साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माना, बालिका को बहला-फुसला कर ले जाने के अपराध में दो साल कैद, पांच हजार रुपये जुर्माना, शव छिपाने के मामले में पांच साल कैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह सजाएं अलग-अलग चलेंगी।

Posted By: Jagran

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