जागरण संवाददाता, देहरादून:

सर मेरे बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई है..। सर मेरी सास का ऑपरेशन होना है..। सर घर में अचानक जरूरी काम आ गया..। ये निवेदन हैं, उन पुलिसकर्मियों के जो इन दिनों छुट्टियों के लिए अफसरों के कक्ष के सामने डेरा डाले हुए हैं। दरअसल, सभी दिसंबर में बच हुए अवकाश अवकाश का उपभोग करना चाहते हैं। ऐसे में अफसर भी पशोपेश में हैं कि किसे छुट्टी दें और किसके आवेदन को खारिज कर दें। पुलिस अफसरों के रोजाना आ रहे 20 से 25 आवेदनों में से सबको अवकाश की स्वीकृति दे दी गई तो महकमे का कामकाज बाधित हो सकता है।

पुलिस महकमे में इन दिनों छुट्टी को लेकर आपाधापी मची है। अधिकारियों के यहां रोजाना अवकाश के लिए सिपाहियों का जमावड़ा लग रहा है। वैसे भी पिछले दिनों उप राष्ट्रपति का दौरा और आइएमए की पीओपी के चलते पुलिस कर्मियों के अवकाश पर मौखिक रूप से रोक लगी हुई थी। ऐसे में अब दिसंबर बीतने के साथ ही छुट्टियों के लैप्स होने की चिंता उन्हें सताने लगी हैं। सूत्रों की मानें तो दिसंबर में अब तक 150 के करीब पुलिसकर्मी अवकाश पर जा चुके हैं और साढ़े तीन सौ के करीब आवेदन अभी लंबित पड़े हैं।

छह तरह की मिलती हैं छुट्टियां

पुलिस विभाग में छह तरह की छुट्टियों का प्रावधान है। इसमें मुख्य अर्जित अवकाश, मेडिकल, आकस्मिक अवकाश, शैक्षणिक, स्पेशल, रिवॉर्ड लीव शामिल है। महिला पुलिसकर्मियों को इसके अलावा मातृत्व अवकाश और बेबी केयर लीव भी देय होता है। वहीं, पुलिसकर्मियों को हर साल 30 उपार्जित, 30 आकस्मिक अवकाश देय हैं, मगर अधिकतर पुलिस कर्मियों को निर्धारित छुट्टिया नहीं मिल पातीं। विभागीय प्रावधान है कि उपार्जित अवकाश 300 तक पहुंचने के बाद ये सभी छुट्टिया समाप्त हो जाती हैं।

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छुट्टी पर रोक नहीं है, जिसकी छुट्टी बची है। यदि उसके आवेदन तर्कसंगत हैं तो उसे छुट्टी दी जाती है। लेकिन, यह भी देखना होता है कि विभागीय कामकाज पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।

निवेदिता कुकरेती, एसएसपी

Posted By: Jagran

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