संवाद सहयोगी, ऋषिकेश :

स्वच्छता को लेकर सरकार व विभिन्न संगठन भले ही कितने स्वच्छता जागरूकता अभियान चला ले लेकिन धार्मिक परिस्थितियों के आगे सब प्रयास फीके पड़ रहे हैं। हकीकत में मंदिरों, मठों, घरों में होने वाली पूजा के बाद पूजन सामग्री के अवशिष्ठ को गंगा में फेंका व प्रवाहित किया जा रहा है। जिससे गंगा में दिनों दिन गंदगी बढ़ती जा रही है।

केंद्र सरकार, राज्य सरकार व विभिन्न राजनीतिक व गैरराजनीतिक संगठन गंगा नदी व सहायक नदियों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लेकिन यह जागरूकता अभियान भी धार्मिक सोच के आगे घुटने टेक देते हैं। मंदिरों, मठों के साथ ही ऋषि मुनियों की अधिक संख्या में वास करने के कारण ही ऋषिकेश को तीर्थनगरी व देवभूमि का दर्जा दिया गया है। यहां प्रतिदिन मंदिरों, मठों, गंगा तटों व आम नागरिकों के घरों में पूजा होती है। इन जगहों पर रोजाना पूजा के बाद अनउपयोगी वस्तुओं को धार्मिक सोच के कारण गंगा में प्रभावित किया जा रहा है। इसी कारण तीर्थनगरी में पूजा में उपयोग होने वाली धार्मिक वस्तुएं, फूल माला, खंडित मूर्तियां, चुन्नी आदि को गंगा नदी में फेंका या प्रवाहित किया जा रहा है। इतना ही नहीं अधिकांश लोग तो धार्मिक कार्ड, भगवान की फोटो लगे कलेंडर व अगरबत्ती के पैकेट आदि तक गंगा में प्रवाहित कर रहे हैं जिससे गंगा में प्रदूषण बढ़ रहा है। तीर्थनगरी में गंगा तटों पर रोजाना सैकडों श्रद्धालु गंगा आरती व अन्य समय में भी गंगा में पुष्प अर्पित कर रहे हैं व गंगा किनारे अगरबत्ती जला रहे हैं जो सीधे गंगा की धारा में समा जाती है।

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हालांकि गंगा तटों पर जगह जगह प्रशासन व विभिन्न समितियों ने गंगा में गंदगी न प्रवाह करने के लिए बोर्ड लगाए हैं। प्रशासन अपने स्तर पर भी गंगा में गंदगी रोकने के लिए कदम उठाता है। गंगा में इस तरह की धार्मिक चीजों का प्रवाह न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।

बृजेश कुमार तिवारी, एडीएम, ऋषिकेश