देहरादून, [जेएनएन]: रामलीला कला समिति, झंडा बाजार की ओर से 150वीं रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को समिति की ओर से धूमधाम से राम बरात निकाली गई। श्रद्धालुओं ने 'राम जी की चली रे बरात जनकपुर नगरी रे, दूल्हा बने राम, दुल्हन बनी सिया, झूमे सारी नगरी रे...' गाकर खुशी मनाई। भव्य बरात में 25 झांकियां, 11 घोड़े और पांच बैंड-बाजों की टीम शामिल रही।

राम बरात में श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए चल रहे थे। भगवान राम अपने रथ पर बैठे सुशोभित हो रहे थे। राजा दशरथ, गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र उनके साथ सवार थे। दूसरे रथ में भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न शोभायमान हो रहे थे। बैंड की मधुर धुनों पर भक्त जय श्री राम के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।

झांकी में भगवान गणेश, काली माता, मां दुर्गा, साईं, राम दरबार, महिषासुर-वध, साधु तपस्या, गंगावतरण, बांके-बिहारी, भरत शत्रुघ्न आदि झांकियां शामिल रहीं। पृथ्वीनाथ महादेव सेवादल, झंडा बाजार दुकानदार समिति, हनुमान मंदिर ट्रस्ट, धामावाला दुकानदार सेवा समिति, पलटन बाजार समिति, मोती बाजार सेवा समिति ने प्रसाद और जलपान वितरण किया। इस दौरान सोम प्रकाश शर्मा, राकेश महेंद्रू, अरविंद गोयल, विक्की गोयल, शोभित मांगलिक, दयाल चंद, राकेश भंडारी, संजय गर्ग, अवधेश पंत, ललित मोहन शर्मा आदि मौजूद रहे।

पुष्प वर्षा से बरात का स्वागत 

शाम पांच बजे शिवाजी धर्मशाला से राम बरात निकाली गई। बरात सहारनपुर चौक, झंडा बाजार, हनुमान चौक, मोती बाजार, मिशन स्कूल, दर्शनलाल चौक, पलटन बाजार, मोती बाजार से दर्शनी गेट होते हुए वापस शिवाजी धर्मशाला में आकर संपन्न हुई। जगह-जगह बरात का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।

स्वर्ण रथ रहा आकर्षण का केंद्र

राम बरात में दिल्ली से पहुंची सपेरा बैंड की टीम और स्वर्ण रामरथ आकर्षण का केंद्र रहा। जिसकी भव्य सजावट रुड़की के कलाकारों ने की। वहीं रुड़की और बिजनौर की बैंड टीम ने शानदार भजनों की प्रस्तुति से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।

सीता स्वयंवर देख मंत्रमुग्ध हो उठे दर्शक 

वहीं, शुभारम्भित श्री रामलीला महोत्सव राजपुर के तीसरे दिन रावण बाणासुर संवाद के बाद मिथिला पुरी के राजा जनक ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर की घोषणा की। अनेक राजाओं ने शिव धनुष को हिलाने का प्रयास किया, लेकिन धनुष को हिला न सके। राजा जनक के संताप को देखकर महर्षि विश्वामित्र ने राम को शिव धनुष भंजन की आज्ञा दी।

भंग होते धनुष की आवाज सुननकर तपस्या में लीन परशुराम ‌ने वहां पहुंचकर क्रोध किया। लक्ष्मण और परशुराम के मार्मिक संवादों ने दर्शकों को ताली बजाने पर विवश कर दिया। शिव धनुष भंजन के बाद राम और सीता का विवाह बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ।

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Posted By: Sunil Negi