जागरण संवाददाता, देहरादून : राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर विद्युत व्यवस्था उपलब्ध न कराने पर शासन ने ऊर्जा निगम के 13 अवर अभियंताओं का तबादला कर दिया। इनमें छह को औद्योगिक और सुगम क्षेत्र से दुर्गम में भेजा गया है जबकि बाकी सात को दुर्गम से सुगम में लाया गया है।

सचिव (ऊर्जा) राधिका झा के अनुसार पिछले लंबे से औद्योगिक घरानों की ओर से विद्युत व्यवस्था बदहाली की शिकायतें मिल रही थीं। उनके अनुसार जांच में पाया गया कि लाइन बाधित होने पर कर्मचारियों द्वारा आपूर्ति बहाल करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए जा रहे। ऐसा इसलिए भी हो रहा था क्योंकि औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से एक ही अवर अभियंता डटे हुए थे। सचिव ने प्रबंध निदेशक ऊर्जा निगम को लंबे समय से डटे अवर अभियंता की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद शुक्रवार को प्रशासनिक आधार पर इन अभियंताओं के तबादले कर दिए गए। इन अवर अभियंताओं में भगवानपुर से मांगे राम को अल्मोड़ा (प्रथम) और अल्मोड़ा से शेरपाल को भगवानपुर भेजा गया है। भगवानपुर से सतीश कुमार को चिन्यालीसौड़ जबकि चिन्यालीसौड़ से विनीत कुमार को भगवानपुर भेजा गया। देवप्रयाग से संजीव कुमार को भगवानपुर पुहाना भेजा गया है। किच्छा यूएसनगर से आशीष काला को पिथौरागढ़ और वहां से उमेश सिंह को किच्छा भेजा गया। किच्छा से रमेश चंद्र आर्य को अल्मोड़ा (द्वितीय) जबकि अल्मोड़ा से भुवन चंद्र उप्रेती को किच्छा भेजा गया। सितारगंज से गुलजार अहमद को पिथौरागढ़ जबकि पिथौरागढ़ से राजेंद्र प्रसाद पाठक को सितारगंज भेजा गया है। हरबर्टपुर से कालू राम को पौड़ी सतपुली जबकि सतपुली से मुनीश कुमार को हरबर्टपुर भेजा गया है। सचिव ऊर्जा ने बताया कि विद्युत आपूर्ति के मापदंडों को अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय आख्या में शामिल किया जाएगा। जिन अधिकारियों को दुर्गम से सुगम में किया गया है, उन्हें विद्युत आपूर्ति और बेहतर बनाने के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं।

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औद्योगिक की चिंता, भूले आमजन

औद्योगिक घरानों ने विद्युत आपूर्ति की शिकायत की तो सरकार के कान तुरंत खड़े हो गए और 13 अभियंताओं का तबादला कर दिया, लेकिन आमजन का क्या। बीते दिनों हुई बरसात में राजधानी देहरादून का आधा हिस्सा पिछले तीन दिन से अंधेरे में है। न बिजली आ रही न पानी। बिजली के टॉवर, खंभे व ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त पड़े हैं। जहां बिजली आ रही, वहां भी लो-वोल्टेज की समस्या बरकरार है। सरकार को इनकी चिंता नहीं। बिजली-पानी न होने से जनता का तीन दिन से गुजारा करना मुश्किल हो चुका है। अभी भी पता नहीं कब तक यह सेवाएं बहाल होंगी।

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