जागरण संवाददाता, देहरादून: नई कंपनी में समायोजन और लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर आपातकालीन सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों ने बुधवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय का घेराव किया। उन्हें स्वास्थ्य महानिदेशालय की तरफ बढ़ता देख परिसर का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। पुलिस ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। जिस पर कर्मचारी वहीं गेट पर धरने पर बैठ गए। करीब तीन घटे तक वहीं धरने पर डटे रहे। जिस कारण न कोई भीतर जा सका और न बाहर आ सका। मेडिकल व नर्सिग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन को आने वाले युवाओं तक को परेशानी उठानी पड़ी। बाद में स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आरके पांडे व डॉ. अमिता उप्रेती ने कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। उनके आश्वासन पर कर्मचारियों ने धरना समाप्त किया।

आपातकालीन सेवा 108 के पूर्व कर्मचारी अपनी मागों को लेकर बीती 30 अप्रैल से परेड मैदान स्थित धरना स्थल पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। छह दिनों से उनका क्रमिक अनशन चल रहा है। इस दौरान उन्हें कई पार्टियों के नेताओं ने समर्थन दिया। जबकि, सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी धरना स्थल पर पहुंचे थे। बुधवार को कर्मचारियों ने डाडा लखौंड स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय कूच किया। स्वास्थ्य महानिदेशालय पर कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना व भाजपा नेता रविंद्र जुगरान भी उनके साथ धरने पर बैठे। उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि कर्मचारी पिछले एक पखवाड़े से आंदोलनरत हैं। पर सरकार व शासन में बैठे लोगों को उनकी पीड़ा दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि नए टेंडर में यह व्यवस्था की जानी थी कि किसी भी पुराने कर्मचारी को नौकरी से हटाया नहीं जाएगा। 700 से अधिक कर्मचारियों के एकसाथ बेरोजगार होना, सरकार की साख पर भी सवाल है।

उधर, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आरके पांडे व डॉ. अमृता उप्रेती ने कर्मचारियों को बताया कि पुरानी कंपनी को पूरा भुगतान किया जा चुका है। उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या का हल निकाला जाएगा। विभाग का यह प्रयास होगा कि उनका बकाया वेतन जल्द मिल जाए। इसके लिए 17 मई को कंपनी के प्रतिनिधियों को बुलाकर त्रिस्तरीय वार्ता की जाएगी। इस दौरान उत्तराखंड 108 व केकेएस कर्मचारी संघ के प्रांतीय सचिव विपिन जमलोकी, रमेश चंद्र डंगवाल, अनिल रावत, उपेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे। श्रम न्यायालय में सुनवाई 20 को

108 के पूर्व कर्मचारियों ने इस मामले में श्रम आयुक्त से भी गुहार लगाई थी। इसमें श्रमायुक्त ने बुधवार की तिथि सुनवाई को नियत की थी। लेकिन, बुधवार को श्रमायुक्त के मौजूद न होने के कारण इस मामले की सुनवाई अब 20 मई को होगी।

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Posted By: Jagran

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