जागरण ब्यूरो, देहरादून

दैवीय आपदा ने केदारनाथ धाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव रामबाड़ा का नामोनिशान ही मिटा दिया। मलबे के ढेर में तब्दील इस इलाके में तीन दिन बाद भी हेलीकाप्टर लैंड होने की स्थिति में नहीं है। केदारनाथ मंदिर चारों ओर से मलबे से घिरा है। मंदिर परिसर में गर्भगृह को नुकसान पहुंचा है, जबकि शंकराचार्य समाधि स्थल मलबे में दब चुका है। प्रदेश में हुई इस तबाही में अब तक 54 लोगों के मरने की पुष्टि हुई, लेकिन यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। केदारनाथ और रामबाड़ा में भारी जन-धन हानि की आशंका जताई जा रही है। रामबाड़ा में पुलिस पिकेट और पीएसी की टुकड़ी का भी अता-पता नहीं है। यात्रा मार्गो पर कई जगह सड़कें ध्वस्त होने से कई स्थानों पर पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र समेत विभिन्न राज्यों के हजारों की तादाद में यात्री फंसे हुए हैं। सोनप्रयाग का पूरा बाजार बह गया। ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग पर देवप्रयाग से आगे सड़कें जगह-जगह टूट चुकी है तो रुद्रप्रयाग पहुंचने में ही तीन-चार दिन लग सकते हैं। वहीं पिथौरागढ़ जिले में तेजाम में भी कई लोगों के हताहत होने की सूचना मिली है।

प्रदेश में बीती शनिवार से 48 घंटे तक भारी बारिश के बाद जहां-तहां तबाही का मंजर तो दिखाई पड़ रहा है, लेकिन हालात इतने बुरे हैं कि 72 घंटे बाद भी मरने वालों की सही संख्या का पता लगना तो दूर, सही अंदाजा लगाना भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है। सचिवालय में मंगलवार को पत्रकारों से मुखातिब मुख्य सचिव सुभाष कुमार समेत आला अधिकारियों ने माना कि हालत बेहद चिंताजनक है। जमीनी संपर्क तो ध्वस्त है ही, संचार नेटवर्क भी दुरुस्त नहीं हो सका है। केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर आपदा ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया। केदारनाथ यात्रा के प्रमुख पड़ाव रामबाड़ा का अता-पता नहीं है। जमीनी संपर्क पूरी तरह खत्म हो चुका है, वहीं हेलीकाप्टर के जरिए भी पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है। हेलीकाप्टर से मुआयना करने पर रामबाड़ा नजर नहीं आया। वहां काफी संख्या में यात्रियों, स्थानीय लोगों के साथ ही पुलिस पिकेट और पीएसी की टुकड़ी का पता नहीं चल रहा। पुलिस पिकेट में महिला कांस्टेबल भी हैं। लापता होने वाले इन सुरक्षा कर्मियों की संख्या 15 के आसपास बताई जा रही है। केदारनाथ, रामबाड़ा में मरने वालों की संख्या काफी बढ़ने का अनुमान है। केदारनाथ में एमआइ-8 हेलीकाप्टर उतरा, लेकिन रामबाड़ा या आसपास बुधवार को ही छोटे हेलीकाप्टर के जरिए पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। गौरीकुंड से काफी संख्या में यात्री व स्थानीय निवासी सुरक्षित स्थान गौरी गांव पहुंचे हैं।

मुख्य सचिव ने बताया कि केदारनाथ, नानूपानी में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के हजारों यात्री फंसे हुए हैं। गुप्तकाशी में भी हालात ठीक नहीं हैं। विजयनगर व तिलवाड़ा अब भी जलमग्न हैं। उन्होंने बताया कि जगह-जगह सड़कें टूटने से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम यात्रा मार्गो पर हजारों की संख्या में यात्री फंसे हैं। रुद्रप्रयाग पहुंचने में तीन-चार दिन लगेंगे। धरासू पहुंचने में अभी तीन दिन लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि मृतकों की सही संख्या का पता मौके पर पहुंचने के बाद ही लग सकेगा। अभी तक राज्य में आपदा की वजह से 54 मौतों की पुष्टि हुई है। पिथौरागढ़ जिले के तेजाम में हताहत होने की सूचना मिली है। धारचूला में पुल टूटे हैं। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक सत्यव्रत, मंडलायुक्त सुब‌र्द्धन, आपदा प्रबंधन सचिव भास्करानंद व सूचना महानिदेशक विनोद शर्मा मौजूद थे।

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