जागरण प्रतिनिधि, चकराता: इन दिनों जौनसार बावर एक माह तक मनाए जाने वाले माघ मरोज पर्व के रंग में रंगा हुआ है। हर गांव के पंचायती आंगन में सामूहिक लोकनृत्य की धूम चल रही है, तो घरों में भी जश्न व दावतों का दौर चल रहा है। लोक संस्कृति की अनूठी छटाएं हर तरफ दिखाई दे रही हैं। कालसी ब्लॉक के कोटा डिमऊ गांव में पर्व के हर रंग दिखाई दे रहे हैं।

जौनसार बावर के प्रमुख त्योहार माघ मरोज की धूम इन दिनों क्षेत्र के 359 राजस्व गांव व 200 मजरों में बसे करीब 16 हजार परिवारों में देखी जा रही है। हर गांव में माघ पर्व पर जश्न है। बाहर नौकरी व व्यवसाय करने वाले लोग भी पैतृक गांव आकर पर्व का आनंद उठा रहे हैं। सगे संबंधी दावतों में शामिल होकर खुश हैं। इससे हर गांव में रौनक है। 11 जनवरी से शुरू माघ मरोज पर्व के तीसरे दिन कोटा डिमऊ गांव में जहां दिन भर सामूहिक लोक गीतों व नृत्यों की धूम रही। वहीं रात को गायण में लोग जमकर थिरके।

पंचायती आंगन में पुरुषों ने लागो तौसों दो तरो.., मईपूरिया ले कुणब.., मिनके बामोटे लाले..गीतों पर खूब झूमे, महिलाओं ने झैंता, रासौ व बिजूरी लोकनृत्यों से समा बांधा। हर परिवार में एक दूसरे को बुलाकर दावतों का दौर चला। कई घरों में गांव के लोगों ने गायण लगाकर नाटियां ठुडू बैणी, दूनिया, सुपनी जैसे पुराने गीत गाए।

वहीं कालसी ब्लॉक के कोटा-डिमऊ गांव में मरोज की रात को स्याणा के घर रात भर गायण लगाकर लोग नाचते रहे। पूरे गांव के पुरुष, महिलाएं जमा होकर पौराणिक गीत हारूल, नतराम, हुमके व ठुडू से खूब समा बांधा।

साजे की धूम

मरोज में गांवों में साजे पर्व की धूम रही। कोटा डिमऊ गांव में लोग हर घर जाकर भोज करने के साथ ही नाचते गाते रहे। पौराणिक गीत छौडे, भारत व सिलौग भी सुनाई दिए।

संक्राति पर्व भी मनाया

मरोज पर्व के तीसरे दिन लोगों ने संक्राति पर्व को धूमधाम से मनाया। पंचायती आंगन में हारूल, झेता, रासौ की धूम रही। मेहमानों को मांसाहारी भेज परोसा गया। एक दूसरे को गले मिल कर बधाई दी। हास्य गीतों व नृत्यों का दौर भी चला।

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