दीपक सिंह बोहरा, चम्पावत

सरकार द्वारा मंदिर, सड़क, धर्मशाला आदि सामाजिक कार्यो के लिए बजट तो आता है, लेकिन वो कहा खपता है यह पता नहीं। ऐसा ही कुछ हाल है पाटी विकासखंड के ग्राम सभा किमाड़ी के गांव किमाड़ का। जहां सरकार से बजट की उम्मीद छोड़ ग्रामीणों ने स्वयं अपने ईष्ट देव के मंदिर, धर्मशाला व पाकशाला निर्माण कराने का बीड़ा उठाया। गांव के करीब सौ परिवारों ने करीब सात लाख से अधिक की धनराशि जमाकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। ग्रामीणों की यह एकता अन्य गांवों के लोगों के लिए तो मिसाल है ही साथ ही सरकार के लिए भी आइना है।

जनपद के पाटी ब्लॉक के ग्राम किमाड़ में ग्रामीणों के आराध्यदेव गुरु गोरखनाथ का प्राचीन मंदिर स्थापित है। वर्तमान समय में गांव में होने वाली सामूहिक पूजा-पाठ, सामाजिक कार्य आदि को देखते हुए ग्रामीणों ने मंदिर में धर्मशाला, पाकशाला व शौचालय की आवश्यकता को महसूस किया। ग्रामीणों ने चैत्र मास की नव रात्रि में मंदिर के पंडित राम दत्त जोशी की अध्यक्षता में व देवी दत्त जोशी के संचालन में एक बैठक की। जिसमें सर्वसम्मति से मंदिर में धर्मशाला व पाकशाला बनाने का संकल्प लिया गया। मंदिर में उक्त निर्माण के लिए दस लाख का इस्टीमेट तैयार कर नवरात्रि के बाद अप्रैल माह से निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। ग्रामीणों ने मंदिर में इस निर्माण कार्य के लिए धन दान एकत्र करना शुरु किया और अभी तक सात लाख से अधिक की धनराशि एकत्रित कर चुके हैं। जिससे धर्मशाला का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। निर्माण कार्य में हरीश चंद्र जोशी, केशव दत्त जोशी, प्रकाश चंद्र जोशी, पीतांबर दत्त जोशी, देवकी नंदन जोशी, पंकज जोशी, जीवन चंद्र, दीपक जोशी, योगेद्र जोशी, ललित मोहन जोशी सहित सभी ग्रामीणों की देख-रेख में निर्माण कार्य चल रहा है। ग्रामीणों ने की भूमि दान

मंदिर में धर्मशाला व पाकशाला निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता थी। जिसके लिए पांच ग्रामीणों ने मंदिर से सटी अपनी लगभग दो नाली भूमि मंदिर को दान की। इसमें ग्रामीण भैरव दत्त जोशी, शंकर दत्त जोशी, बच्ची राम जोशी, राम दत्त जोशी, रमेश चंद्र जोशी ने मंदिर को भूमि दान दी। बाहर रह रहे ग्रामीण भी कर रहे हैं दान

गांव में लगभग 100 परिवार हैं जिनमें से अधिकांश लोग जॉब के कारण बाहर ही रहते हैं। लेकिन फिर भी वे अपने आराध्य देव के मंदिर में किए जा रहे सामाजिक कार्य में सहयोग कर रहे हैं। वे बाहर से ही मंदिर समिति के बैंक खाते में सहयोग राशि डाल रहे हैं। जो अधिक दान देने में असमर्थ हैं उन्होंने दिया श्रमदान

गांव में कई ऐसे भी लोग हैं जो इतने सक्षम नहीं हैं कि वे अधिक धन दान कर सकें लेकिन वे मंदिर निर्माण में श्रम दान कर रहे हैं। जो जिससे निर्माण कार्य को गति मिली है। अन्य गांवों के लोगों को भी अपने मंदिर, मार्ग व अन्य सामाजिक कार्यो के लिए सजग होना होगा। सरकार से उम्मीद लगाकर बैठने की बजाय स्वयं प्रयास करना चाहिए।

- देवी दत्त जोशी, ग्रामीण गांव की कई समस्याओं के लिए सरकार से की गई बजट की मांग कभी पूरी नहीं हुई। जिससे हर बार निराशा ही हाथ लगी। इसी को ध्यान में रखते हुए हम लोगों ने स्वयं ही अपने खर्च पर इसका निर्माण कराने का निर्णय लिया।

- हरीश चंद्र जोशी, ग्रामीण सरकारी तंत्र फिजूल खर्ची व कमिशनखोरी पर विश्वास करता है। जब सरकारी तंत्र ने नहीं सुनी तो हमने स्वयं ही चंदा करना शुरू किया और निर्माण कार्य शुरू कराया।

- योगेंद्र जोशी, ग्रामीण

Posted By: Jagran