विनय कुमार शर्मा, चम्पावत

माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रोंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा, मै रौंदूंगी तोय। कुम्हार को मिट्टी ने नहीं बल्कि आज सरकार की उपेक्षाओं ने रौंद दिया है। जिसके कारण कुम्हारों की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। मगर इस बार प्रदेश सरकार ने कुम्हारों को दिवाली तक काफी राहत दी है। सरकार ने शिल्प कला को बढ़ावा देने व चाइनीज सामानों से लोगों को दूर करने के उद्देश्य से कुम्हारों को बिना रायल्टी मिट्टी उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में बकायदा अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिए हैं।

दीपावली का पर्व आते ही कुम्हारों में खुशी की लहर दौड़ने लगती है। कुम्हार परिवार सहित दिन रात एक कर दीपावली से हफ्तों पूर्व मिट्टी के दियों को बनाने में जुट जाता है। कुम्हार दिये बनाने के लिए पहले तालाब या खेतों से महंगे दामों पर मिट्टी खरीद कर लाता है। फिर मिट्टी को साफ कर उसमें से कंकर पत्थर को अलग करता है। इसके बाद मिट्टी को गूंधता है। जिसके बाद कुम्हार उसे चाक पर चढ़ाकर उसे आकार देने का काम करता है। आकार देने के बाद मिट्टी के बर्तनों को आग में 24 घंटों तक पकाया जाता है। तब कहीं जाकर मिट्टी के दिये व दीपक तैयार होते हैं। जिस कारण कुम्हार दियों को महंगे दामों पर बेचते हैं। जिस कारण लोग मिट्टी के दियों को खरीदने के बजाय प्लास्टिक के झालर व चाइनीज दियों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। जिसके चलते कुम्हारों की आय पर इसका असर देखने को मिला है। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने लोगों को मिट्टी के दियों से दीपावली मनाने के लिए कुम्हारों को राहत दी है। वह मिट्टी के लिए इधर उधर न भटकें। इसके लिए सरकार ने बगैर रायल्टी के मिट्टी कुम्हारों को उपलब्ध करवाने जा रही है। यह आदेश केवल दीपावली त्यौहार तक है। जिससे कुम्हार सस्ते दामों पर मिट्टी के दिये बेच सकेंगे और लोग भी इसे आसानी से खरीद सकेंगे।

मिट्टी के उत्पादों की कीमत

मिट्टी के दीये 50 रुपये के सौ पीस

बड़े दीये पाच रुपये के दो पीस

फूलदान 20 से 60 रुपये पीस

छोटा कलश 250 रुपये के सौ पीस

बड़ा कलश आठ रुपये पीस

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चीन का सामान

पाच मीटर झालर 15 रुपये

दस मीटर झालर 50 रुपये

25 मीटर झालर 75 रुपये

50 मीटर झालर 125 रुपये

गुलदस्ते 20 से 100 रुपये तक

मिट्टी के दियों की महत्ता

दिया बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दीयों को जला हम अपने मन और जीवन में फैले अंधकार को दूर कर उन्हें फिर से रोशन बनाते हैं। दिया जिंदगी की प्रेरणा प्रदान करता है। लोग ऐसा मानते हैं की दिया जलने से जो भी जिंदगी में नकरात्मक उर्जा मौजूद होती है, वह धीरे धीरे सकरात्मक उर्जा में परिवर्तित हो जाती है। दिया जलाने से दिमाग की एकाग्रता बढ़ती है। प्राचीन समय में दिए की रौशनी से ही लोग पढ़ाई करते थे।7 लाइट के आने से दिए जलने तो बंद हो गए लेकिन अभी भी कई लोग दिवाली पर जलते दीयों से पढ़ाई में एकाग्रता और मन लगने की प्रार्थना करते हैं।

तो अबकी दिवाली मिट्टी के दीयों वाली

दीपावली की तैयारिया जोरों पर हैं। इस दौरान चल रहे चायनीज सामान के बहिष्कार के मद्देनजर चाइनीज झालर नहीं बल्कि मिट्टी के दीये लोगों की पसंद बन रहे हैं। दीयों की खरीदारी तेज होने से कुम्हार भी काफी गदगद है। हम दीपावली पर्व पर दीया-बत्ती जलाएंगे। मिट्टी दीया खरीदने से जहा कुम्हारों का रोजगार बढ़ेगा वहीं देश की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। इससे हमारे देश का पैसा देश में ही रहेगा।

वर्जन-

दीपावली पर्व पर दियों व अन्य सामान बनाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिट्टी को कुम्हारों के लिए सरकार ने रायल्टी मुक्त कर दिया है। यह आदेश दीपावली त्यौहार तक मान्य होगा। = राजपाल लेघा, उपनिदेशक, खनन

Posted By: Jagran

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