जागरण संवाददाता, चम्पावत : प्रदेश में डॉक्टरों को कमी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बन कर खड़े फार्मासिस्ट ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं संभाले हुए हैं। बुधवार को जिला सभागार में आयोजित विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर गोष्ठी में फार्मासिस्टों में कही।

गोष्ठी में सेफ एंड इफेक्टिव मेडीसन पर चर्चा की गयी। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी और सीएमस डॉ. आरके जोशी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। फार्मासिस्टों ने बताया कि चम्पावत जिले की अगर बात करें तो जिला अस्पताल में 3 सीएचसी लोहाघाट में 3 संयुक्त चिकित्सालय में 3 फार्मासिस्ट हैं। जिले की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन फार्मासिस्ट की संख्या कम है। पूरे जिले में 54 के सापेक्ष 51 फार्मासिस्ट तैनात हैं। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी लगातर बढ़ रही है, लेकिन फार्मास्टिों की संख्या कम है। इस दौरान आम जनता को दवाओं के सेवन के संबंध में जागरूकता पैदा करने के साथ दवा को किस तरह प्रयोग में लाना है और दवा के औषधीय गुणों के विषय चर्चा की गयी। लोगों मे जैनरिक और ब्रांडेड दवाओं के विषय में जो भ्रम की स्थिति बनी है उसे दूर करने के साथ किस प्रकार से सस्ती दवायें लोगों तक पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा की गयी। गोष्ठी में बोलते हुए सीएमओ आरपी खंडूडी और सीएमस आरके जोशी ने फार्मासिस्टों की प्रशसा करते हुए कहा कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण अंग हैं। इस दौरान फार्मासिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष मुकुल राय, डॉ. श्वेता खर्कवाल, एमसी जोशी, जगदीश कुंवर, विष्णुगिरि गोस्वामी, सुरेश चन्द्र पाटनी आदि लोग मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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